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जे के पी लिटरेचर
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622cb22959c46ebed7c6fad4 साधन साध्य - होली 2022 //d2pyicwmjx3wii.cloudfront.net/s/61949a48ba23e5af80a5cfdd/622cb4e3e3bc0140d04be9e9/webp/holi2022.jpg

होली के पावन पर्व पर सभी साधकों को हार्दिक बधाई!

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी होली का त्यौहार परम प्रिय आचार्य श्री के सान्निध्य में बिताये गये दिनों की मधुर यादें लेकर आया है। होली का रंग गुरुवर के संग। किस प्रकार हास परिहास मनोविनोद करते हुए उन्होंने भक्ति रस लुटाया है। भगवान् की सर्वव्यापकता के सिद्धान्त का सन्देश देते हुए सभी साधकों को बार बार जगाया है। उठाया है, पढ़ाया है, याद कराया है। एक क्षण को भी यह न भूलो कि हरि गुरु सदा सर्वत्र साथ हैं। बस यही होली मनाने का उद्देश्य है। किन्तु इस अंक में उनके इस नये स्वरूप 'गुरु धाम भक्ति मन्दिर' का संक्षिप्त वर्णन किया जा रहा है। जो युगों युगों तक भक्तियोगरसावतार, निखिलदर्शन, समन्वयाचार्य इत्यादि अनन्त गुणों से युक्त उनके अलौकिक चरित्र, उनकी करुणा, उनकी कृपा, उनका ज्ञान एवं प्रेम रस का बखान करते हुए जीवों का मार्ग दर्शन करता रहेगा।

गुरुधाम ही प्राणों से प्यारा लगे,
गुरुधाम में मोहिं बसाये रहो।
नित गुरु का ही सुमिरन मैं करूँ,
जग जाल से मोहिं बचाये रहो ॥

Sadhan Sadhya - Holi 2022
in stock INR 160
1 1

साधन साध्य - होली 2022

भाषा - हिन्दी

₹160
₹200   (20%छूट)
डॉलर में प्रदर्शित मूल्य अमेरिकी डॉलर में है


प्रकार विक्रेता मूल्य मात्रा

विवरण

होली के पावन पर्व पर सभी साधकों को हार्दिक बधाई!

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी होली का त्यौहार परम प्रिय आचार्य श्री के सान्निध्य में बिताये गये दिनों की मधुर यादें लेकर आया है। होली का रंग गुरुवर के संग। किस प्रकार हास परिहास मनोविनोद करते हुए उन्होंने भक्ति रस लुटाया है। भगवान् की सर्वव्यापकता के सिद्धान्त का सन्देश देते हुए सभी साधकों को बार बार जगाया है। उठाया है, पढ़ाया है, याद कराया है। एक क्षण को भी यह न भूलो कि हरि गुरु सदा सर्वत्र साथ हैं। बस यही होली मनाने का उद्देश्य है। किन्तु इस अंक में उनके इस नये स्वरूप 'गुरु धाम भक्ति मन्दिर' का संक्षिप्त वर्णन किया जा रहा है। जो युगों युगों तक भक्तियोगरसावतार, निखिलदर्शन, समन्वयाचार्य इत्यादि अनन्त गुणों से युक्त उनके अलौकिक चरित्र, उनकी करुणा, उनकी कृपा, उनका ज्ञान एवं प्रेम रस का बखान करते हुए जीवों का मार्ग दर्शन करता रहेगा।

गुरुधाम ही प्राणों से प्यारा लगे,
गुरुधाम में मोहिं बसाये रहो।
नित गुरु का ही सुमिरन मैं करूँ,
जग जाल से मोहिं बचाये रहो ॥

विशेष विवरण

भाषा हिन्दी
शैली / रचना-पद्धति आध्यात्मिक पत्रिका
फॉर्मेट पत्रिका
लेखक राधा गोविंद समिति
प्रकाशक राधा गोविंद समिति
पृष्ठों की संख्या 72
वजन (ग्राम) 223
आकार 21.5 सेमी X 28 सेमी X 0.4 सेमी

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