Atma Kalyana

Instructions for daily living
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Pages: 64
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जो साधक आश्रम में रहकर गुरु सेवा कर रहे हैं, जिन्होंने अपना सर्वसमर्पण कर दिया किन्तु फिर भी अनन्त जन्मों के अभ्यास एवं लापरवाही से गुरुधाम मे रहकर भी क्षण क्षण का सदुपयोग न करके प्रपंच में लगे रहते हैं, उन साधकों के लिए परम प्रिय गुरुवर कितनी आत्मीयता रखते थे, कितना दु:खी होकर उनके कल्याण के लिए चिन्तित रहते थे, इस पुस्तक को पढ़ने से उसकी एक झलक प्राप्त हो जायगी।

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