Prema Rasa Madira Part-2 Ebook Hindi
Prema Rasa Madira Part-2 Ebook Hindi
Description
विश्व के पाँचवें मूल जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा रचित ग्रन्थ प्रेम रस मदिरा कोई साधारण काव्य संग्रह नहीं, अपितु दिव्य प्रेमरस से परिपूर्ण ऐसा अलौकिक ग्रन्थ है, जो जीव को प्रेम की सर्वोच्च अवस्था तक ले जाने में समर्थ है।
इस पद्यात्मक ग्रन्थ में 1008 पदों को 21 माधुरियों में विभक्त किया गया है। यह ग्रन्थ दो भागों में प्रकाशित है, जिनमें प्रत्येक भाग में 11-11 माधुरियाँ समाहित हैं।
प्रेम रस मदिरा के प्रथम भाग में यह बताया गया कि साधक भक्ति का प्रारम्भ कैसे करे तथा तथा क्रमशः भगवत्प्रेम की ओर कैसे अग्रसर हो। वहीं द्वितीय भाग की माधुरियों में श्रीराधा-कृष्ण के प्रेम के अन्तरंगतम एवं अत्यन्त गोपनीय भावों का सजीव वर्णन किया गया है।
द्वितीय भाग की माधुरियाँ इस प्रकार हैं -
12. लीला-माधुरी, 13. महासखी-माधुरी, 14. निकुंज-माधुरी, 15. मिलन-माधुरी, 16. मान-माधुरी, 17. मुरली-माधुरी, 18. होरी-माधुरी, 19. विरह-माधुरी, 20. रसिया-माधुरी, 21. प्रकीर्ण-माधुरी।
इन माधुरियों में श्रीराधा-कृष्ण की विविध मधुर लीलाओं, मिलन का सौरस्य, विरह की व्याकुलता, प्रेम में रूठना-मनाना इत्यादि का अत्यन्त सजीव चित्रण किया गया है।
प्रत्येक पद में प्रेम रस की ऐसी धारा प्रवाहित होती है कि उसमें डूबकर साधक बार-बार उसी आनन्द का पुनः आस्वादन करना चाहता है।
Specifications
| Language | Hindi |
| Genre | Sankirtan |
| Classification | Principal Composition |
| Author | Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj |
| Publisher | Radha Govind Samiti |
| ISBN | 9789390373604 |
Author Introduction
Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
The greatest spiritual master of the modern era and the foremost exponent of eternal Vedic philosophy, who reconciled all the world’s philosophies and faiths. He was the only saint to be honoured with the unprecedented title of JAGADGURUTTAM, acclaimed as the world’s pre-eminent scholar of all scriptures. Observing his state of being ever immersed in the divine love bliss of Shri Radha Krishna, the title of BHAKTIYOGA-RASAVATAR was also conferred upon him.
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