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जे के पी लिटरेचर
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619c91650da9d22a7a6c6982 युगल शतक //d2pyicwmjx3wii.cloudfront.net/s/61949a48ba23e5af80a5cfdd/62f0cb689be9ef6151eec630/webp/012-audiobook-mockup-covervault.jpg

ब्रजरस में सराबोर करने वाला युगल-शतक एक अद्वितीय एवं अनुपमेय ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में श्री कृष्ण के पचास पद तथा श्री राधारानी के पचास पद संकलित किये गये हैं। कृपा स्वरूपा राधारानी के दिव्य धाम बरसाना में जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा यह अमूल्य निधि प्राप्त हुई। इन पदों में निहित रस का रसास्वादन तो कोई रसिक ही कर सकता है फिर भी पाठक पढ़ने के बाद अनुभव करेंगे, ऐसा रस कभी नहीं मिला। श्री महाराज जी जब नया पद सुनाते हैं तो मूर्तिमान रस ही प्रतीत होते हैं। ऐसा लगता है मानो वह रस भी हैं और रसास्वादक भी।

प्रज्ञा चक्षु वालों के लिए भी और ब्रज रस पिपासु भावुक भक्तों के लिये भी यह ग्रन्थ अत्यधिक उपयोगी है; क्योंकि इन पदों में केवल लीला-माधुरी और शृंगार माधुरी ही नहीं है, सिद्धान्त पक्ष का भी समावेश है।

Yugal Shatak - Hindi
in stockUSD 168
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युगल शतक

युगल शतक

ब्रजरस में सराबोर श्री राधाकृष्ण पर आधारित सौ संकीर्तन
भाषा - हिन्दी

$10.5
$18.75   (44%छूट)
डॉलर में प्रदर्शित मूल्य अमेरिकी डॉलर में है


विशेषताएं
  • जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज द्वारा रचित 100 संकीर्तन; श्रीकृष्ण पर आधारित 50 और श्री राधा पर आधारित 50 पदों का समावेश
  • व्याख्या सहित दीए गए प्रत्येक पद, रूपध्यान हेतु अत्यंत सहायक
  • श्रीकृष्ण के अति मनमोहक और श्रीराधा रानी के अकारण करुण स्वभाव को उजागर करने वाले पद
  • श्री राधा कृष्ण की बाल लीलाओं का सुललित वर्णन
प्रकारविक्रेतामूल्यमात्रा

विवरण

ब्रजरस में सराबोर करने वाला युगल-शतक एक अद्वितीय एवं अनुपमेय ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में श्री कृष्ण के पचास पद तथा श्री राधारानी के पचास पद संकलित किये गये हैं। कृपा स्वरूपा राधारानी के दिव्य धाम बरसाना में जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा यह अमूल्य निधि प्राप्त हुई। इन पदों में निहित रस का रसास्वादन तो कोई रसिक ही कर सकता है फिर भी पाठक पढ़ने के बाद अनुभव करेंगे, ऐसा रस कभी नहीं मिला। श्री महाराज जी जब नया पद सुनाते हैं तो मूर्तिमान रस ही प्रतीत होते हैं। ऐसा लगता है मानो वह रस भी हैं और रसास्वादक भी।

प्रज्ञा चक्षु वालों के लिए भी और ब्रज रस पिपासु भावुक भक्तों के लिये भी यह ग्रन्थ अत्यधिक उपयोगी है; क्योंकि इन पदों में केवल लीला-माधुरी और शृंगार माधुरी ही नहीं है, सिद्धान्त पक्ष का भी समावेश है।

विशेष विवरण

भाषाहिन्दी
शैली / रचना-पद्धतिसंकीर्तन
विषयवस्तुसर्वोत्कृष्ट रचना, भक्ति गीत और भजन, तत्वज्ञान, रूपध्यान
फॉर्मेटपेपरबैक
वर्गीकरणप्रमुख रचना
लेखकजगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
प्रकाशकराधा गोविंद समिति
पृष्ठों की संख्या228
वजन (ग्राम)280
आकार14 सेमी X 22 सेमी X 1.5 सेमी

पाठकों के रिव्यू

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