Yugal Shatak

Ever flowing divine love
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Pages: 218
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ब्रजरस में सराबोर करने वाला युगल-शतक एक अद्वितीय एवं अनुपमेय ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में श्री कृष्ण के पचास पद तथा श्री राधारानी के पचास पद संकलित किये गये हैं। कृपा स्वरूपा राधारानी के दिव्य धाम बरसाना में 
जगद्​गुरु  श्री कृपालु जी महाराज द्वारा यह अमूल्य निधि प्राप्त हुई। इन पदों में निहित रस का रसास्वादन तो कोई रसिक ही कर सकता है फिर भी पाठक पढ़ने के बाद अनुभव करेंगे, ऐसा रस कभी नहीं मिला। श्री महाराज जी जब नया पद सुनाते हैं तो मूर्तिमान रस ही प्रतीत होते हैं। ऐसा लगता है मानो वह रस भी हैं और रसास्वादक भी।

प्रज्ञा चक्षु वालों के लिए भी और ब्रज रस पिपासु भावुक भक्तों के लिये भी यह ग्रन्थ अत्यधिक उपयोगी है; क्योंकि इन पदों में केवल लीला-माधुरी और शृंगार माधुरी ही नहीं है, सिद्धान्त पक्ष का भी समावेश है।

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