Sharat Purnima 2012

The teachings and works inspired by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
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Pages: 60
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...धन्यो मान्य जगद्गुरूत्तम पदै: सोऽयं समभ्यर्च्यते।
जगद्गुरूत्तम पद पर सुशोभित परम प्रिय गुरुवर के पावन जन्म दिवस पर सभी को हार्दिक बधाई।
जगद्गुरूत्तम जयन्ती महोत्सव में भाग लेने के लिए विश्व के कोने कोने से श्रद्धालु अपने श्रद्धा सुमन परम कृपालु गुरुवर के कोमल चरणों में समर्पित करने के लिए एकत्र हुये हैं।
कृपासिन्धु गुरुवर तो किसी से कुछ अपेक्षा ही नहीं करते वे तो पुन: पुन: यही कहते हैं मुझे प्रसन्न करना चाहते हो, मुझे बधाई देना चाहते हो, तो एक ही प्रतिज्ञा करो-
श्यामा श्याम नाम रूप लीला गुण धामा।
गाओ रोके रूपध्यान युक्त आठों यामा॥
अत: प्रस्तुत अंक में साधना सम्बन्धी विभिन्न तथ्यों का निरूपण किया गया है, जो श्री महाराज जी ने समय समय पर हमें समझाया है। उन्होंने सम्पूर्ण जीवन हम सबकी सेवा में ही समर्पित किया है। हर क्षण, हर पल, उनका चिन्तन, मनन, स्मरण यही रहता है किस प्रकार कलियुग में इन जीवों का निरन्तर हरि गुरु स्मरण हो और ये निष्काम अनन्य भक्ति द्वारा शीघ्रातिशीघ्र अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लें।

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