Radha Govind Geet (H)

(Vol. 1-2)
Encyclopedia of divine knowledge
Availability: In stock
Pages: 984
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राधा गोविंद गीत एक अद्वितीय एवं अनुपमेय ग्रंथ है। समस्त वेदों, शास्त्रों, पुराणों एवं अन्यान्य धर्मग्रंथों के सार को जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ने इतने सरस एवं सरल रूप में प्रस्तुत किया है कि जन साधारण भी उसे हृदयंगम करके वैदिक सिद्धान्तों का ज्ञाता बन सकता है, जो स्वयं अध्ययन करके तो सर्वथा असंभव ही है। भगवत्क्षेत्र संबंधी सभी प्रश्नों का उत्तर इस अनमोल ग्रंथ में निहित है। सिद्धान्त-पक्ष की अभूतपूर्व समन्वयात्मक विवेचना के साथ-साथ लीला-पक्ष का माधुर्य भी ऐसा है कि वज्र हृदय भी भक्ति-रस से ओतप्रोत हो जाय। अधिक क्या कहा जाय, वस्तुत: दैहिक, दैविक, भौतिक तापों में तप रहे कलिमल-ग्रसित जीवों के लिये यह ग्रंथ अनन्त करुणा-वरुणालय स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा अपनी अकारण-करुणा के वशीभूत होकर की गई शीतल सुधा-वृष्टि ही है। पाठक जन इस ग्रंथ का अध्ययन करके उपरोक्त बात की यथार्थता का स्वयं अनुभव करेंगे।

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