{"product_id":"prema-rasa-madira-part-1-ebook-hindi","title":"Prema Rasa Madira Part-1 Ebook Hindi","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eविश्व के पाँचवें मूल \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003eजगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e द्वारा रचित ग्रन्थ \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003eप्रेम रस मदिरा\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e कोई साधारण काव्य संग्रह नहीं, अपितु दिव्य प्रेमरस से परिपूर्ण ऐसा अलौकिक ग्रन्थ है, जो जीव को प्रेम की सर्वोच्च अवस्था तक ले जाने में समर्थ है।\u003cbr\u003eइस पद्यात्मक ग्रन्थ में \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e1008 पदों को 21 माधुरियों\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e में विभक्त किया गया है। यह ग्रन्थ दो भागों में प्रकाशित है, जिनमें प्रत्येक भाग में 11-11 माधुरियाँ समाहित हैं।\u003cbr\u003eप्रथम भाग की माधुरियाँ इस प्रकार है -\u003cbr\u003e1. सद्गुरु-माधुरी, 2. आरती-माधुरी, 3. सिद्धान्त-माधुरी, 4. दैन्य-माधुरी, 5. धाम-माधुरी, 6. प्रेम-माधुरी, 7. श्री कृष्ण बाललीला माधुरी, 8. श्री राधा बाललीला माधुरी, 9. श्री कृष्ण माधुरी, 10. श्री राधा माधुरी, 11. युगल माधुरी।\u003cbr\u003eयह ग्रन्थ प्रत्येक स्तर के साधक के लिये समान रूप से उपयोगी है। साधक के हृदय में जिस क्षण जैसा भाव उदित हो, उसी अनुरूप यह ग्रन्थ उसे मार्गदर्शन एवं रस-आस्वादन प्रदान करता है, और धीरे-धीरे उसके अन्तःकरण में भगवत्प्रेम का संचार कर देता है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"RGPS","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":60776152334622,"sku":null,"price":500.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0867\/9020\/9822\/files\/PRMHindiebook1.jpg?v=1793436830","url":"https:\/\/www.jkpliterature.org.in\/products\/prema-rasa-madira-part-1-ebook-hindi","provider":"JKP Literature","version":"1.0","type":"link"}