Your browser does not support JavaScript!

G-12, G-14, Plot No-4 CSC, HAF Sector-10, Dwarka 110075 New Delhi IN
जे के पी लिटरेचर
G-12, G-14, Plot No-4 CSC, HAF Sector-10, Dwarka New Delhi, IN
+918588825815 https://www.jkpliterature.org.in/s/61949a48ba23e5af80a5cfdd/621dbb04d3485f1d5934ef35/logo-18-480x480.png" [email protected]
9789380661933 619c917d9b2efd2adf9b6e8a गुरु तत्त्व https://www.jkpliterature.org.in/s/61949a48ba23e5af80a5cfdd/63848473c51ed47326b12c04/guru-tattva-book.jpg

हमारे देश में बाबाओं की बाढ़ सी आयी हुई है, जो शास्त्र वेद का नाम तक नहीं जानते, वे लोगों के कान फूंक फूंक कर लोगों को गुमराह कर रहें हैं और धर्म के नाम पर व्यापार चला रहे हैं। जगद्गुरु कृपालु जी महाराज ने इन सबके विरुद्ध आवाज उठाई एवं निर्भीकता पूर्वक शास्त्रों के अनुसार वास्तविक गुरु कैसा होना चाहिये यह समझाकर सही मार्ग दर्शन किया। जीवनपर्यन्त उन्होंने किसी का भी कान नहीं फूंका, तब ही उनके बारे में सब बाबा यही कहते थे, न चेला बनाता है न बनाने देता है। वे स्वयं भी कहते थे ‘न गुरु न कोई चेला, कृपालु फिरे अकेला।’ वेद से लेकर रामायण तक सभी ग्रन्थों में गुरु तत्त्व का निरूपण किया गया है। आचार्य श्री ने शास्त्रानुसार वास्तविक गुरु कौन और उसको कैसे पहचाना जाय? इत्यादि विषयों पर अपने अनेक प्रवचनों में प्रकाश डाला है। प्रस्तुत पुस्तक में उनके विभिन्न प्रवचनों के अंशों को संकलित किया गया है। इस विषय को समझना परमावश्यक है जिससे कोई भी साधक सही गुरु के मार्गदर्शन में साधना करके अपने चरम लक्ष्य को प्राप्त कर सके।

प्रस्तुत पुस्तक में उनके कुछ प्रवचनों के अंश संकलित किये गये हैं। पूर्णतया प्रयास किया गया है कि आचार्य श्री की दिव्य वाणी को यथार्थ रूप में ही प्रस्तुत किया जाय। अंग्रेजी भाषा के शब्द भी वैसे ही लिखे गये हैं जैसे उन्होंने बोले हैं।

Guru Tattva - Hindi
in stock USD 274
1 1

गुरु तत्त्व

वेदों-शास्त्रों में निरूपित गूढ गुरु तत्त्व को सरल भाषा में जाने
भाषा - हिन्दी

$3.31
$6.03   (45%छूट)


विशेषताएं
  • गुरु तत्त्व क्या है? भक्ति में गुरु की भूमिका क्या है?
  • सनातन धर्म की आत्मा क्या है?
  • वास्तविक महापुरुष को पहचानने के कुछ उपाय।
  • रामायण, गीता, भागवत, पुराण क्या कहते हैं गुरु तत्त्व के संदर्भ में
  • वास्तविक गुरु कैसे मिलता है?
SHARE PRODUCT
प्रकार विक्रेता मूल्य मात्रा

विवरण

हमारे देश में बाबाओं की बाढ़ सी आयी हुई है, जो शास्त्र वेद का नाम तक नहीं जानते, वे लोगों के कान फूंक फूंक कर लोगों को गुमराह कर रहें हैं और धर्म के नाम पर व्यापार चला रहे हैं। जगद्गुरु कृपालु जी महाराज ने इन सबके विरुद्ध आवाज उठाई एवं निर्भीकता पूर्वक शास्त्रों के अनुसार वास्तविक गुरु कैसा होना चाहिये यह समझाकर सही मार्ग दर्शन किया। जीवनपर्यन्त उन्होंने किसी का भी कान नहीं फूंका, तब ही उनके बारे में सब बाबा यही कहते थे, न चेला बनाता है न बनाने देता है। वे स्वयं भी कहते थे ‘न गुरु न कोई चेला, कृपालु फिरे अकेला।’ वेद से लेकर रामायण तक सभी ग्रन्थों में गुरु तत्त्व का निरूपण किया गया है। आचार्य श्री ने शास्त्रानुसार वास्तविक गुरु कौन और उसको कैसे पहचाना जाय? इत्यादि विषयों पर अपने अनेक प्रवचनों में प्रकाश डाला है। प्रस्तुत पुस्तक में उनके विभिन्न प्रवचनों के अंशों को संकलित किया गया है। इस विषय को समझना परमावश्यक है जिससे कोई भी साधक सही गुरु के मार्गदर्शन में साधना करके अपने चरम लक्ष्य को प्राप्त कर सके।

प्रस्तुत पुस्तक में उनके कुछ प्रवचनों के अंश संकलित किये गये हैं। पूर्णतया प्रयास किया गया है कि आचार्य श्री की दिव्य वाणी को यथार्थ रूप में ही प्रस्तुत किया जाय। अंग्रेजी भाषा के शब्द भी वैसे ही लिखे गये हैं जैसे उन्होंने बोले हैं।

विशेष विवरण

भाषा हिन्दी
शैली / रचना-पद्धति सिद्धांत
विषयवस्तु गुरु - सच्चा आध्यात्मिक पथ प्रदर्शक, तत्वज्ञान
फॉर्मेट पेपरबैक
वर्गीकरण संकलन
लेखक जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
प्रकाशक राधा गोविंद समिति
पृष्ठों की संख्या 226
वजन (ग्राम) 278
आकार 14 सेमी X 22 सेमी X 1.5 सेमी
आई.एस.बी.एन. 9789380661933

पाठकों के रिव्यू

  0/5