Prema Rasa Siddhanta - Complete Ebook

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A miraculous explanation of the divine science
$ 33.00
Pages: 330

यह तो आप जानते ही हैं कि विश्व का प्रत्येक जीव आनन्द ही चाहता है किन्तु वह आनन्द क्या है? कहाँ है? कैसे मिल सकता है? इत्यादि प्रश्‍​नों के सही-सही उत्तर न जानने के कारण ही सभी जीव उस आनन्द से वंचित हैं। हिन्दू धर्म ग्रन्थों में अनेक धर्माचार्य हुये एवं उन लोगों ने अपने-अपने अनुभवों के आधार पर अनेक ग्रन्थ लिखे जिनमें परस्पर विरोधाभास-सा है। पाठक उन ग्रन्थों को पढ़कर कुछ भी निश्‍​चय नहीं कर पाता। इतना ही नहीं वरन् और भी संशयात्मा हो जाता है।

इस ‘प्रेम रस सिद्धान्त’ ग्रन्थ की प्रमुख विशेषता यही है कि उन समस्त विरोधी सिद्धान्तों का सुन्दर सरल भाषा में समन्वय किया गया है। आचार्य चरण ने वेदों, शास्त्रों के प्रमाणों के अतिरिक्त दैनिक अनुभवों के उदाहरणों द्वारा सर्वसाधारण के लाभ को दृष्टिकोण में रखते हुये, विषयों का निरूपण किया है। वैसे तो ज्ञान की कोई सीमा नहीं है फिर भी इस छोटे से ग्रन्थ में जीव का चरम लक्ष्य, जीव एवं माया तथा भगवान् का स्वरूप, महापुरुष परिचय, कर्म, ज्ञान, भक्ति साधना आदि का निरूपण किया है जिसे जन साधारण समझ सकता है। साथ ही समस्त शंकाओं का भी निवारण कर सकता है।

आचार्य चरण किसी सम्प्रदाय विशेष से सम्बद्ध नहीं हैं। अतएव उनके इस ग्रन्थ में सभी आचार्यों का सम्मान किया गया है। निराकार, साकार ब्रह्म एवं अवतार रहस्य का प्रतिपादन तो अनूठा ही है। अन्त में कर्मयोग सम्बन्धी प्रतिपादन पर विशेष जोर दिया गया है, क्योंकि सम्पूर्ण संसारी कार्यों को करते हुये ही संसारी लोगों को अपना लक्ष्य प्राप्त करना है। इस ग्रन्थ के विषय में क्या समालोचना की जाय, बस गागर में सागर के समान ही सम्पूर्ण तत्त्वज्ञान भरा है। जिसका पात्र जितना बड़ा होगा वह उतना ही बड़ा लाभ ले सकेगा। इतना ही निवेदन है कि पाठक एक बार अवश्य पढ़ें।

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