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Prema Rasa Siddhanta - 10 Jnana and Bhakti

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Pages: 40

इस अध्याय में ज्ञान एवं भक्ति तत्त्व को विस्तारपूर्वक समझाया गया एवं यह सारांश बताया गया कि ज्ञानमार्गीय केवल ब्रह्म को ही नित्य तत्त्व मानता है एवं भक्ति-मार्गीय जीव, माया, ब्रह्म इन तीनों को नित्य तत्त्व मानता है। पश्चात् ब्रह्मानन्द एवं प्रेमानन्द में क्या अन्तर है, यह भी बताया गया।

पूर्व चार जगद्गुरु श्री शंकराचार्य, श्री रामानुजाचार्य, श्री निम्बार्काचार्य एवं श्री माध्वाचार्य तथा श्री वल्लभाचार्य एवं राधावतार श्री चैतन्यदेव गौरांग महाप्रभु आदि रसिक महापुरुषों  के क्रमशः अद्वैत, विशिष्टाद्वैत, द्वैताद्वैत, द्वैत तथा भक्ति तत्त्व के सिद्धान्तों को प्रस्तुत किया गया एवं उनमें कौन सा मार्ग श्रेष्ठ है, किस मार्ग में क्या क्या कठिनतायें हैं इन सभी प्रश्नों का समाधान अत्यधिक सरलता से किया गया।