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Prema Rasa Siddhanta - 4 Sharanagati

Surrender
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Pages: 6

सर्वात्म-समर्पण से ही माया से मुक्ति एवं भगवत्कृपा का लाभ हो सकता है। कुछ न करने का नाम ही शरणागति है। बन्धन एवं मोक्ष का कारण मन ही है। मन के शरणागत होने पर सबकी शरणागति स्वयमेव हो जायगी। यदि हमारा मन, न संसार में आसक्त होता न भगवान् में आसक्त होता तब तो सुगमता होती। अतएव सर्वप्रथम यह आवश्यक है कि हम संसार का वास्तविक स्वरूप समझें एवं वहाँ से मन को उदासीन करें, तभी ईश्वर-शरणागति सम्भव है।