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Prema Rasa Siddhanta - 11 Avatara Rahasya

Impersonal, Personal God and the secret of descension
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Pages: 8

निराकार एवं साकार, ब्रह्म के दो स्वरूप हैं। इन दोनों में क्या अन्तर है एवं साकार ब्रह्म की भक्ति ही देहधारियों के लिये श्रेष्ठ क्यों बताई गई है, ब्रह्म को साकार बनकर अवतार लेने की क्या आवश्यकता है, इन सब विवादों का समाधान किया गया।

अवतार लेने के अनन्त कारण होते हैं, उन्हें कोई सीमा में नहीं बाँध सकता। अवतार का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारण ईश्वर की अकारण करुणा ही हो सकती है। क्योंकि जिसका किसी से राग- द्वेष नहीं है और जो अपने में ही तृप्त एवं आत्माराम-पूर्णकाम है, उसका स्वयं का कोई स्वार्थ हो ही नहीं सकता, उसका सब कार्य परार्थ ही होगा।

सगुण-साकार संसार को व्यवहार में लाते-लाते जीवों का स्वभाव बन गया है कि उनके मन की रुचि सगुण-साकार तत्त्व में ही होती है। अतएव भगवान् ने अवतार लेकर सगुण-साकार वातावरण दे दिया, जिसके परिणाम-स्वरूप अनन्तानन्त जीवों का कल्याण हो रहा है। (अर्थात् भगवान् के अवतारकाल में तथा अवतार के पश्चात् उनके नाम, रूप, गुण, लीला, जन एवं धाम आदि का निरन्तर चिन्तन करते हुये जीव भगवान् को पाकर आनन्द प्राप्ति के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।)