Prem Marg (H)

All paths culminate in love
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Pages: 56
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अनन्त बार हमें मानव देह मिला, अनन्त सन्तों के प्रवचन सुने, अनन्त बार वेदों शास्त्रों का अध्ययन किया, किन्तु यह निश्चय नहीं हो पाया, वह भगवान् कैसे मिलेगा। जैसे समुद्र में नदियाँ अनेक मार्गों से होकर जाती हैं, किन्तु अन्त में समुद्र में ही मिल जाती हैं। इसी प्रकार अनेक मार्ग हैं—भगवान् में लीन होने के लिये, भगवान् के आनन्द को प्राप्त करने के लिये, भगवान् के ज्ञान को प्राप्त करने के लिये। किन्तु, आचार्य श्री के अनुसार केवल एक मार्ग है भगवान् को पाने का, कोई झगड़ा नहीं बीच में। उसे प्रेम मार्ग कहते हैं, भक्ति मार्ग कहते हैं, उपासना मार्ग कहते हैं, अनेक नाम हैं। इसी तथ्य का निरूपण प्रस्तुत प्रवचन में किया गया है।

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