Pranadhana Jivana Kunja Bihari

You alone are mine and I am Yours
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Pages: 256
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सभी साधकों का पुन: पुन: प्रेमाग्रह रहता है कि श्री महाराज जी द्वारा दिये गये प्रवचन पुस्तक रूप में भी प्रकाशित किये जायें, जिससे विषय हृदयंगम करने में सुविधा हो किन्तु यह तो असम्भव ही है क्योंकि उनके द्वारा दिये गये प्रवचनों की सूची ही अपने आपमें एक वृहद् ग्रन्थ है। फिर भी सामर्थ्यानुसार कुछ प्रवचन शृंखलायें प्रकाशित की जा रही हैं। उनके द्वारा विरचित ‘प्रेम रस मदिरा’ ग्रन्थ का प्रत्येक पद ही गागर में सागर है। उसमें छिपे गूढ़ शास्त्रीय रहस्यों को अलौकिक प्रतिभा सम्पन्न ही समझ सकता है। अकारण करुण गुरुवर ने अपने श्री मुख से कुछ पदों की व्याख्या समय समय पर की है। जो भगवत्प्रेमीपिपासुओं के लिए अनमोल निधि है।

उनके द्वारा ‘प्रेम रस मदिरा’ के पद -
प्राणधन जीवन कुंज बिहारी(प्रेम रस मदिरा- ३.६४) की व्याख्या सन् १९८१ में दस प्रवचनों में की है। यह प्रवचन शृंखला पुस्तक के रूप में प्रकाशित की जा रही है। इसमें श्री महाराज जी ने साधना का स्वरूप, शरणागति का रहस्य, शरणागति में बाधा इत्यादि विषयों पर प्रकाश डाला है।