Mere Nandanandana

Songs glorifying Shri Krishna
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Pages: 64
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जगद्​गुरु श्री कृपालु जी महाराज के रोम रोम में राधा कृष्ण के दिव्य प्रेमामृत का सिन्धु समाया हुआ है। श्री महाराज जी के दिव्य प्रेम रस से सराबोर हृदय की मधुर मधुर झनकारें उनके द्वारा रचित सहस्त्रों भक्ति रचनाओं में प्रतिध्वनित होती हैं। इन रचनाओं का प्रत्येक छन्द रस के सिन्धु की भाँति भक्ति की तन्मयता से तरंगित है। इन अनमोल गीतों को पढ़कर हृदय स्वत: ही आनन्द, प्रेम एवं दिव्य ब्रजरस में निमज्जित हो उठता है।

इस पुस्तक में जगद्​गुरु श्री कृपालु जी महाराज के इन मूल ग्रन्थों से कीर्तन लिए गये हैं:
1. प्रेम रस मदिरा
2. ब्रज रस माधुरी - भाग 1, 2, एवं 3
3. युगल शतक
4. युगल माधुरी

इन ग्रन्थों में कई कीर्तन सैंकड़ों अथवा सहस्त्रों पंक्तियों के हैं। अत: मेरे नँदनंदन पुस्तक में, एक प्रारम्भिक परिचय की दृष्टि से, कीर्तनों के कुछ अंश ही रखे गये हैं। किसी भी कीर्तन के विस्तृत एवं प्रामाणिक स्वरूप के लिये मूल ग्रन्थ का ही अवलोकन करें। यह पुस्तक, अगाध प्रेम रस सिन्धु का एक बिन्दु मात्र है।

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