Kamana Aur Upasana

(Vol. 1-2)
Advice for the mind of a spiritual seeker
Availability: In stock
Pages: 464
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भक्तियोगरसावतार जगद्​गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा रचित ग्रन्थ ‘प्रेम रस मदिरा’ में १००८ पद हैं। प्रत्येक पद गागर में सागर है। साधारण बुद्धि से उसकी थाह पाना असम्भव है। समय समय पर अकारण करुण गुरुदेव ने कुछ पदों की व्याख्या की है। पद ‘सुनो मन एक काम की बात’ (प्रेम रस मदिरा-३.११८) की विस्तृत व्याख्या जो कि महाराज जी ने अपनी एक प्रवचन शृंखला के रूप में मनगढ़ में सन् १९८४ के वार्षिक साधना शिविर में सहज ही प्रकट की, उसे एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है।

इस प्रवचन शृंखला में श्री महाराज जी ने अनुराग-वैराग्य, कामना-उपासना, कर्मयोग-कर्मसंन्यास को लेकर उठने वाली शंकाओं का समाधान अत्यन्त ही सरल रूप में किया है।

पुस्तक को बार बार पढ़ने से तत्त्व ज्ञान परिपक्व होगा जिससे भगवत्प्रेम पिपासु साधक श्री महाराज जी द्वारा बताई गई विधि द्वारा रूपध्यान करते हुए, संसारी कामना को भगवान् सम्बन्धी कामना बनाने का अभ्यास कर, कर्मयोग एवं कर्मसंन्यास की साधना अपनाकर अपना कल्याण करेंगे। इसी आशा के साथ यह पुस्तक आपके सन्मुख प्रस्तुत है।

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