Holi 2009

The teachings and works inspired by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
Availability: In stock
Pages: 60
*
*

होली का पावन पर्व भक्ति धाम में हम सभी के लिये अनेक उपहार लेकर आया है। रंग-बिरंगे ब्रजरस से भरी हुई पिचकारियाँ एवं परम निष्काम गोपी-प्रेम का गुलाल अबीर रसिकवर गुरु वर के हाथ में है, वे सभी को दिव्य ब्रजरस में सराबोर करने के लिये आतुर हैं। बस हम झूठे रंग-बिरंगे सांसारिक मायिक सुखों को भूलकर अपने मन को केवल युगल प्रेम कामना में ही रंग दें और करु ण क्रन्दन कर अकारण करुण गुरुदेव से परम निष्काम गोपी-प्रेम की याचना करें।
प्रेम भिक्षां देहि! प्रेम भिक्षां देहि! प्रेम भिक्षां देहि!
श्री युगल चरणों में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दें जिससे मन सदा-सदा के लिए श्याम रंग में रंग जाये ऐसा रंग जो कभी न छूटे।
तनु रंग छूटे धोये गोविन्द राधे।
श्याम रंग छूटे न मन को बता दे॥
गुरु: कृपालुर्मम शरणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।
गोपी प्रेम भाव भरणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।
राधा कृष्ण-प्रेम भरणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।

Recently viewed Books