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9789380661971 619c9174a3460945dfe57d07 सुनहु साधक प्यारे - हिन्दी https://www.jkpliterature.org.in/s/61949a48ba23e5af80a5cfdd/63d778a2f0c13dc2928dcbd2/sunahu-sadhak-pyare.jpg

जगद्गुरु श्रीकृपालु जी महाराज द्वारा रचित ‘युगल माधुरी’ पुस्तक में संकलित इस पद में सारे शास्त्रों, वेदों एवं पुराणों का सार है अर्थात् इतने को अगर कोई समझ ले और प्रैक्टिकल  कर ले, तो उसे न कुछ पढ़ना है, न सुनना है, न समझना है, न करना है। गागर में सागर है।

भक्ति-धाम मनगढ़ में आयोजित वार्षिक साधना शिविर में श्री गुरुदेव के श्रीमुख से इस पद की विस्तृत व्याख्या नवम्बर 2002 में (15-11-2002 से 19-11-2002) की गई थी।

इस पुस्तक में यह व्याख्या यथार्थ रूप में ही प्रकाशित की जा रही है। अंग्रेजी के शब्दों का भी हिन्दी में अनुवाद नहीं किया गया है। यह प्रवचन शृंखला सभी कक्षा के साधकों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

भक्ति-सम्बन्धी समस्त शास्त्रीय-ज्ञान इस पद में समाहित है। इससे अधिक तत्त्वज्ञान की आवश्यकता ही नहीं।

Sunahu Sadhak Pyare - Hindi
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सुनहु साधक प्यारे - हिन्दी

सुनहु साधक प्यारे - हिन्दी

यदि साधक ऐसे भक्ति करेगा तो कभी पतन नहीं होगा।
भाषा - हिन्दी

₹116
₹150   (23%छूट)


विशेषताएं
  • भक्ति करने के लिये किन बातों का अभ्यास करना होगा। साधकों के लिये उपयोग आने वाली प्रमुख बातें।
  • समस्त साधकों के लिये श्री महाराज जी का विशेष उपदेश
  • भक्ति मार्ग की ओर चलने वाले साधकों के लिये साधना का सम्पूर्ण क्रम क्या होना चाहिये जानिये।
  • साधकों को किससे और कैसे बचना है, साधकों के लिये विशेष प्रवचन।
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प्रकारविक्रेतामूल्यमात्रा

विवरण

जगद्गुरु श्रीकृपालु जी महाराज द्वारा रचित ‘युगल माधुरी’ पुस्तक में संकलित इस पद में सारे शास्त्रों, वेदों एवं पुराणों का सार है अर्थात् इतने को अगर कोई समझ ले और प्रैक्टिकल  कर ले, तो उसे न कुछ पढ़ना है, न सुनना है, न समझना है, न करना है। गागर में सागर है।

भक्ति-धाम मनगढ़ में आयोजित वार्षिक साधना शिविर में श्री गुरुदेव के श्रीमुख से इस पद की विस्तृत व्याख्या नवम्बर 2002 में (15-11-2002 से 19-11-2002) की गई थी।

इस पुस्तक में यह व्याख्या यथार्थ रूप में ही प्रकाशित की जा रही है। अंग्रेजी के शब्दों का भी हिन्दी में अनुवाद नहीं किया गया है। यह प्रवचन शृंखला सभी कक्षा के साधकों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

भक्ति-सम्बन्धी समस्त शास्त्रीय-ज्ञान इस पद में समाहित है। इससे अधिक तत्त्वज्ञान की आवश्यकता ही नहीं।

विशेष विवरण

भाषाहिन्दी
शैली / रचना-पद्धतिसिद्धांत
विषयवस्तुछोटी किताब, प्रैक्टिकल साधना, तनाव और डिप्रेशन रहित जीवन, अभ्यास की शक्ति
फॉर्मेटपेपरबैक
वर्गीकरणप्रवचन
लेखकजगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
प्रकाशकराधा गोविंद समिति
पृष्ठों की संख्या113
वजन (ग्राम)149
आकार14 सेमी X 22 सेमी X 0.8 सेमी
आई.एस.बी.एन.9789380661971

पाठकों के रिव्यू

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