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जे के पी लिटरेचर
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619c916f9b2efd2adf9b6d31 निष्काम प्रेम //d2pyicwmjx3wii.cloudfront.net/s/61949a48ba23e5af80a5cfdd/619d00d2d2ceca38330419cd/webp/060-book-boxset-small-spine-mockup-covervault.jpg

श्रीकृष्ण की नित्य सेवा प्राप्त करना ही प्रत्येक जीव का अन्तिम लक्ष्य है तदर्थ निष्काम प्रेम प्राप्त करना होगा। निष्काम प्रेम प्राप्ति की साधना तो तभी प्रारम्भ हो सकती है जब हम निष्काम प्रेम का अर्थ भली भाँति समझे। संसार में भी प्रेम शब्द बोला जाता है, किन्तु प्रेम क्या है, सकाम निष्काम प्रेम का क्या रहस्य है इत्यादि प्रश्नों का समाधान होना परमावश्यक है। तब ही कोई साधक अपने लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर हो सकेगा। प्रस्तुत पुस्तक में श्री महाराज जी द्वारा सन् 1989 में दिये गये चार प्रवचन यथार्थ रूप में प्रकाशित किये जा रहे हैं। साधकों के लिए अनमोल खजाना है।

Nishkam Prem - Hindi
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निष्काम प्रेम

निस्वार्थ प्रेम केवल भगवान् से
भाषा - हिन्दी

$9.19
$15.63   (41%छूट)
डॉलर में प्रदर्शित मूल्य अमेरिकी डॉलर में है


विशेषताएं
  • भक्ति के स्वरूप और निष्काम प्रेम पर आधारित पुस्तक
  • श्री कृष्ण की निष्काम सेवा के लक्ष्य को कैसे प्राप्त किया जाय ?
  • सकाम और निष्काम प्रेम के बीच में क्या अंतर है?
  • श्रीकृष्ण के प्रति गोपियों के प्रेम पर उठने वाली सभी शंकाओं का निराकरण
  • श्री कृपालु जी महाराज द्वारा इस प्रवचन में निरूपित सभी सिद्धान्तों के शास्त्रीय प्रमाण
प्रकार विक्रेता मूल्य मात्रा

विवरण

श्रीकृष्ण की नित्य सेवा प्राप्त करना ही प्रत्येक जीव का अन्तिम लक्ष्य है तदर्थ निष्काम प्रेम प्राप्त करना होगा। निष्काम प्रेम प्राप्ति की साधना तो तभी प्रारम्भ हो सकती है जब हम निष्काम प्रेम का अर्थ भली भाँति समझे। संसार में भी प्रेम शब्द बोला जाता है, किन्तु प्रेम क्या है, सकाम निष्काम प्रेम का क्या रहस्य है इत्यादि प्रश्नों का समाधान होना परमावश्यक है। तब ही कोई साधक अपने लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर हो सकेगा। प्रस्तुत पुस्तक में श्री महाराज जी द्वारा सन् 1989 में दिये गये चार प्रवचन यथार्थ रूप में प्रकाशित किये जा रहे हैं। साधकों के लिए अनमोल खजाना है।

विशेष विवरण

भाषा हिन्दी
शैली / रचना-पद्धति सिद्धांत
विषयवस्तु निष्काम प्रेम, तत्वज्ञान, निष्कामता, रागानुगा भक्ति, शरणागति, अध्यात्म के मूल सिद्धांत
फॉर्मेट पेपरबैक
वर्गीकरण प्रवचन
लेखक जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
प्रकाशक राधा गोविंद समिति
पृष्ठों की संख्या 105
वजन (ग्राम) 156
आकार 14 सेमी X 22 सेमी X 0.8 सेमी

पाठकों के रिव्यू

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