राधे राधे
G-12, G-14, Plot No-4 CSC, HAF Sector-10, Dwarka 110075 New Delhi IN
जे के पी लिटरेचर
G-12, G-14, Plot No-4 CSC, HAF Sector-10, Dwarka New Delhi, IN
+918588825815 //cdn.storehippo.com/s/61949a48ba23e5af80a5cfdd/621dbb04d3485f1d5934ef35/logo-18-480x480.png" [email protected]
9789380661889 619c918c0da9d22a7a6c6df7 जगद्गुरूत्तम - जीवन परिचय //cdn.storehippo.com/s/61949a48ba23e5af80a5cfdd/61a5fba60cbd77db550d9b42/042-iphone6-with-dust-jacket-book-covervault.jpg

जिनका प्रत्येक शब्द, प्रत्येक वाक्य, प्रत्येक प्रवचन, प्रत्येक संकीर्तन नानापुराण वेद शास्त्र सम्मत है। ऐसे भारतीय धर्म संस्कृति, ऋषि परम्परा के संवाहक प्रेमरस रसिक भक्तियोगरसावतार कृपालु गुरुदेव का जीवन चरित्र अलौकिक है, उनकी कथा अकथनीय है उनकी गुणावलि का गान असम्भव ही है। ऐसे अनन्त गुणों की खान, ज्ञान के अगाध समुद्र जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से ग्राम मनगढ़ में हुआ जो वर्तमान में भक्ति-धाम के नाम से विख्यात है। ये समन्वयवादी जगद्गुरु थे। आपने समस्त शास्त्रों, वेदों, पुराणों एवं पाश्चात्य दार्शनिक सिद्धान्तों के परस्पर विरोधी मत मतान्तरों का समन्वय किया।

समस्त भारतीय दर्शनों का, ज्ञान और भक्ति का एवं भौतिकवाद और अध्यात्मवाद का समन्वय करते हुए सभी आचार्यों का सम्मान करते हुए भक्तियोग प्राधान्य सार्वभौमिक सिद्धान्त प्रस्तुत किया, जो देश काल की सीमा से परे है। इसे सभी जाति, सभी सम्प्रदाय के लोग अपना सकते हैं। आपने सनातन धर्म के नाम पर व्याप्त पाखण्ड, रूढ़िवादिता, धर्मान्धता का निर्भीक खण्डन करते हुए सनातनवैदिकधर्म प्रतिष्ठापित किया।

समस्त भारतीय वाङ्मय का सार वेदों, शास्त्रों, पुराणों आदि के मर्म को सरल, सरस वाणी में प्रस्तुत करके अपने प्रवचन के माध्यम से श्रोताओं को, साहित्य के माध्यम से पाठकों को और संकीर्तन के माध्यम से साधकों की मनोभूमि में बैठाने वाले पंचम मूल जगद्गुरु को तत्कालीन काशी विद्वत्परिषत् द्वारा 14 जनवरी सन् 1957 में जगद्गुरूत्तम घोषित किया गया।

अपना सम्पूर्ण जीवन जीव कल्याण हित समर्पित करने वाले विश्वोद्धारक, विश्वबन्धु, विश्वशान्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाले, विश्व गुरु की सदा ही जय हो।

Jagadguruttam - Hindi
in stockUSD 1000
3 5
जगद्गुरूत्तम - जीवन परिचय

जगद्गुरूत्तम - जीवन परिचय

जगद्गुरूत्तम की अनसुनी अलौकिक जीवन गाथा
भाषा - हिन्दी

$12.04
$24.09   (50%छूट)


विशेषताएं
  • जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की विलक्षण जीवनगाथा।
  • कौन हैं अद्वितीय एवं विलक्षण व्यक्तित्व वाले जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज?
  • जीवकल्याणार्थ समर्पित श्री महाराज जी की जीवन यात्रा।
  • श्री महाराज जी द्वारा विश्व को समर्पित प्रेम उपहार एवं समस्त जीवों पर की गई करुणा की गुणावली।
  • जानिये कृपालु जी महाराज की जगद्गुरूत्तम बनने की ऐतिहासिक घटना।
प्रकारविक्रेतामूल्यमात्रा

विवरण

जिनका प्रत्येक शब्द, प्रत्येक वाक्य, प्रत्येक प्रवचन, प्रत्येक संकीर्तन नानापुराण वेद शास्त्र सम्मत है। ऐसे भारतीय धर्म संस्कृति, ऋषि परम्परा के संवाहक प्रेमरस रसिक भक्तियोगरसावतार कृपालु गुरुदेव का जीवन चरित्र अलौकिक है, उनकी कथा अकथनीय है उनकी गुणावलि का गान असम्भव ही है। ऐसे अनन्त गुणों की खान, ज्ञान के अगाध समुद्र जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से ग्राम मनगढ़ में हुआ जो वर्तमान में भक्ति-धाम के नाम से विख्यात है। ये समन्वयवादी जगद्गुरु थे। आपने समस्त शास्त्रों, वेदों, पुराणों एवं पाश्चात्य दार्शनिक सिद्धान्तों के परस्पर विरोधी मत मतान्तरों का समन्वय किया।

समस्त भारतीय दर्शनों का, ज्ञान और भक्ति का एवं भौतिकवाद और अध्यात्मवाद का समन्वय करते हुए सभी आचार्यों का सम्मान करते हुए भक्तियोग प्राधान्य सार्वभौमिक सिद्धान्त प्रस्तुत किया, जो देश काल की सीमा से परे है। इसे सभी जाति, सभी सम्प्रदाय के लोग अपना सकते हैं। आपने सनातन धर्म के नाम पर व्याप्त पाखण्ड, रूढ़िवादिता, धर्मान्धता का निर्भीक खण्डन करते हुए सनातनवैदिकधर्म प्रतिष्ठापित किया।

समस्त भारतीय वाङ्मय का सार वेदों, शास्त्रों, पुराणों आदि के मर्म को सरल, सरस वाणी में प्रस्तुत करके अपने प्रवचन के माध्यम से श्रोताओं को, साहित्य के माध्यम से पाठकों को और संकीर्तन के माध्यम से साधकों की मनोभूमि में बैठाने वाले पंचम मूल जगद्गुरु को तत्कालीन काशी विद्वत्परिषत् द्वारा 14 जनवरी सन् 1957 में जगद्गुरूत्तम घोषित किया गया।

अपना सम्पूर्ण जीवन जीव कल्याण हित समर्पित करने वाले विश्वोद्धारक, विश्वबन्धु, विश्वशान्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाले, विश्व गुरु की सदा ही जय हो।

विशेष विवरण

भाषाहिन्दी
शैली / रचना-पद्धतिजीवनी
विषयवस्तुगुरु - सच्चा आध्यात्मिक पथ प्रदर्शक, तत्वज्ञान
फॉर्मेटकॉफी टेबल बुक
वर्गीकरणविशेष
लेखकराधा गोविंद समिति
प्रकाशकराधा गोविंद समिति
पृष्ठों की संख्या248
वजन (ग्राम)1033
आकार23 सेमी X 28.5 सेमी X 2.3 सेमी
आई.एस.बी.एन.9789380661889

पाठकों के रिव्यू

  0/5

3 रिव्यू

Best book in the world ❤️
प्रमाणित उपयोगकर्ता
May 4, 2023 2:33:25 PM
This is the best book in the world ❤️❤️🌹
प्रमाणित उपयोगकर्ता
May 4, 2023 2:31:15 PM
Best book that I have bought through online in my life.O my god the writings,the photos of this book make it one of its own kind 💎. Quintessential thing that depicts about Shree Maharajis life& journey from begging of his life.Suggest everyone should buy this book.🤗 Radhe Radhe
Trijyoti Patra
Jul 17, 2022 12:51:49 PM