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विश्व का प्रत्येक जीव एकमात्र नित्यानन्द की ही खोज में है किन्तु अनन्तानन्त जन्मों के अनवरत प्रयास के पश्चात् भी उस आनन्द का लवलेश भी प्राप्त न हो सका। क्योंकि यह आनन्द केवल भगवान् को जानकर ही प्राप्त होगा। भगवान् को जानने के लिये किसी श्राेत्रिय ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष की शरणागति परमावश्यक है। अहंकार के कारण हम आज तक किसी महापुरुष के शरणागत नहीं हुए।

यह शरणागति क्या है और किस प्रकार श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ गुरु के शरणागत होकर जीव आगे बढ़ सकता है, इत्यादि विषय अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। आचार्य श्री ने इस विषय पर सैकड़ों प्रवचन दिये हैं जो हमारी एक अमूल्य निधि है किन्तु दैनिक जीवन की भाग दौड़ करते हुए सम्भव नहीं है कि हम उनके सभी प्रवचन सुन सकें। अतः उनके गुरु शरणागति सम्बन्धी प्रवचनों के प्रमुख प्रमुख अंशों को पुस्तक रूप में संकलित किया गया है। जो हर साधक के लिये परमोपयोगी है और परमावश्यक भी है। जिससे वह दम्भी गुरुओं के चंगुल से बचकर सही गुरु के शरणागत हो सके।

Guru Sharanagati - Hindi
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गुरु शरणागति

गुरु शरणागति

सर्वप्रथम गुरु की शरणागति क्यों आवश्यक है?
भाषा - हिन्दी

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विशेषताएं
  • ये गुरु शरणागति क्या है? यह क्यों आवयश्यक है?
  • हम क्यों भगवान् एवं गुरु के शरणागत हों? क्या है शरणागति?
  • पूर्ण शरणागत हो जाने पर क्या होता है? जानिये शरणागति का विज्ञान।
  • गुरु के शरणागत होने से पूर्व इन बातो को सदा याद रखें।
  • यदि गुरु की शरण में जा रहे हो तो इसे एक बार जरूर पढ़े।
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प्रकारविक्रेतामूल्यमात्रा

विवरण

विश्व का प्रत्येक जीव एकमात्र नित्यानन्द की ही खोज में है किन्तु अनन्तानन्त जन्मों के अनवरत प्रयास के पश्चात् भी उस आनन्द का लवलेश भी प्राप्त न हो सका। क्योंकि यह आनन्द केवल भगवान् को जानकर ही प्राप्त होगा। भगवान् को जानने के लिये किसी श्राेत्रिय ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष की शरणागति परमावश्यक है। अहंकार के कारण हम आज तक किसी महापुरुष के शरणागत नहीं हुए।

यह शरणागति क्या है और किस प्रकार श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ गुरु के शरणागत होकर जीव आगे बढ़ सकता है, इत्यादि विषय अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। आचार्य श्री ने इस विषय पर सैकड़ों प्रवचन दिये हैं जो हमारी एक अमूल्य निधि है किन्तु दैनिक जीवन की भाग दौड़ करते हुए सम्भव नहीं है कि हम उनके सभी प्रवचन सुन सकें। अतः उनके गुरु शरणागति सम्बन्धी प्रवचनों के प्रमुख प्रमुख अंशों को पुस्तक रूप में संकलित किया गया है। जो हर साधक के लिये परमोपयोगी है और परमावश्यक भी है। जिससे वह दम्भी गुरुओं के चंगुल से बचकर सही गुरु के शरणागत हो सके।

विशेष विवरण

भाषाहिन्दी
शैली / रचना-पद्धतिसिद्धांत
विषयवस्तुगुरु - सच्चा आध्यात्मिक पथ प्रदर्शक, तत्वज्ञान
फॉर्मेटपेपरबैक
वर्गीकरणसंकलन
लेखकजगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
प्रकाशकराधा गोविंद समिति
पृष्ठों की संख्या144
वजन (ग्राम)179
आकार14 सेमी X 22 सेमी X 1 सेमी
आई.एस.बी.एन.9789380661919

पाठकों के रिव्यू

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1 समीक्षा

very useful!
deepti
Dec 4, 2022 12:18:59 PM