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हमारे देश में धार्मिक नेताओं की बाढ़-सी आयी हुई है। जो शास्त्र-वेद का नाम तक नहीं जानते, वे धर्म के नाम पर केवल अपना व्यापार चला रहे हैं। अनेक प्रकार की भ्रान्तियाँ, जैसे- मंत्र दीक्षा लेना, सम्प्रदायवाद चलाना इत्यादि फैलाकर भोली-भाली जनता को गुमराह कर रहे हैं। यानी धर्म का स्वरूप विकृत हो रहा है।

ऐसी परिस्थिति में यह समझना परमावश्यक है कि गुरु किसे बनाया जाय और गुरु मंत्र अथवा गुरु दीक्षा से क्या तात्पर्य है?

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज इस विषय पर बहुत स्पष्ट शब्दों में बोलते हैं। इस पुस्तक को पढ़ने के बाद पाठक शंका न करें कि यह किसी सम्प्रदाय विशेष या धार्मिक नेता के लिए कहा गया है। आचार्य श्री जो कुछ भी कहते हैं, शास्त्र सम्मत है। वेदों -शास्त्रों के प्रमाणों पर आधारित है। वे तो सदैव अपने अनुयायियों के मस्तिष्क में यह सिद्धान्त ही भरते हैं कि निन्दनीय की भी निन्दा मत करो, किसी के प्रति भी दुर्भावना मत करो अन्यथा वह गुरु द्रोही कहलायेगा।

Guru Mantra - Hindi
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गुरु मंत्र

गुरु मंत्र

दीक्षा और गुरु मंत्र का रहस्य
भाषा - हिन्दी

$0.9


विशेषताएं
  • क्या है गुरु दीक्षा का वास्तविक नियम? गुरु मंत्र लेने के लिये क्या करें?
  • गुरु मंत्र दीक्षा लेने से पहले ये अवश्य पढ़े।
  • गुरु जी क्या मंत्र कान में देते हैं यदि जानना चाहते हों तो आज ही पढ़े गुरु मंत्र पुस्तक में छिपे रहस्य को।
  • यदि आप ने भी किसी गुरु से गुरु मंत्र लिया है तो इन बातों को जान लीजिये कहीं आप धोखे में तो नहीं है।
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प्रकारविक्रेतामूल्यमात्रा

विवरण

हमारे देश में धार्मिक नेताओं की बाढ़-सी आयी हुई है। जो शास्त्र-वेद का नाम तक नहीं जानते, वे धर्म के नाम पर केवल अपना व्यापार चला रहे हैं। अनेक प्रकार की भ्रान्तियाँ, जैसे- मंत्र दीक्षा लेना, सम्प्रदायवाद चलाना इत्यादि फैलाकर भोली-भाली जनता को गुमराह कर रहे हैं। यानी धर्म का स्वरूप विकृत हो रहा है।

ऐसी परिस्थिति में यह समझना परमावश्यक है कि गुरु किसे बनाया जाय और गुरु मंत्र अथवा गुरु दीक्षा से क्या तात्पर्य है?

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज इस विषय पर बहुत स्पष्ट शब्दों में बोलते हैं। इस पुस्तक को पढ़ने के बाद पाठक शंका न करें कि यह किसी सम्प्रदाय विशेष या धार्मिक नेता के लिए कहा गया है। आचार्य श्री जो कुछ भी कहते हैं, शास्त्र सम्मत है। वेदों -शास्त्रों के प्रमाणों पर आधारित है। वे तो सदैव अपने अनुयायियों के मस्तिष्क में यह सिद्धान्त ही भरते हैं कि निन्दनीय की भी निन्दा मत करो, किसी के प्रति भी दुर्भावना मत करो अन्यथा वह गुरु द्रोही कहलायेगा।

विशेष विवरण

भाषाहिन्दी
शैली / रचना-पद्धतिसिद्धांत
विषयवस्तुगुरु - सच्चा आध्यात्मिक पथ प्रदर्शक, तत्वज्ञान, छोटी किताब
फॉर्मेटपेपरबैक
वर्गीकरणसंकलन
लेखकजगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
प्रकाशकराधा गोविंद समिति
पृष्ठों की संख्या97
वजन (ग्राम)93
आकार12.5 सेमी X 18 सेमी X 0.8 सेमी
आई.एस.बी.एन.9788194238690

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