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9789380661384 619c9188855f3937690983d5 गुरु गोविंद https://www.jkpliterature.org.in/s/61949a48ba23e5af80a5cfdd/619cf75ca6b3f44453d884f5/060-book-boxset-small-spine-mockup-covervault.jpg

वेद से लेकर रामायण तक सभी ग्रन्थों में गुरु महिमा का विस्तृत विवेचन किया गया है। अन्यान्य धर्म ग्रन्थों में भी गुरु-सेवा, गुरु-शरणागति को ही भगवत्प्राप्ति का एक मात्र उपाय बताया गया है। भगवत्पथ पर चलने के लिए सर्वप्रथम किसी श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष का मार्गदर्शन परमावश्यक है। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा प्रकटित साहित्य नानापुराण वेद सम्मत है। भक्ति सम्बन्धी तत्त्वज्ञान देकर संसारासक्त जीवों को ब्रजरस का अधिकारी बनाकर ब्रजरस में सराबोर करना ही इनके साहित्य एवं प्रवचनों का मुख्य उद्देश्य है, जो सद्गुरु-शरणागति के बिना असम्भव ही है। यद्यपि सभी शास्त्रों वेदों में गुरु गुण गान भरा पड़ा है, किन्तु वह संस्कृत भाषा में होने के कारण जनसाधारण के लिए बोध गम्य नहीं है।

‘गुरु गोविंद’ पुस्तक में जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा विरचित राधा गोविंद गीत के गुरु तत्त्व सम्बन्धी दोहों को संकलित किया गया है।

Guru Govind - Hindi
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गुरु गोविंद

गुरु गोविंद

गुरु संबंधी रस से आप्लावित सुमधुर पदावली।
भाषा - हिन्दी

$1.02
$1.21   (15%छूट)


विशेषताएं
  • गुरु कृपा पर आधारित राधा गोविंद गीत के अमूल्य एवं सारगर्भित दोहे।
  • गुरु को भगवान् से बड़ा क्यों माना जाता है?
  • सभी जीवों पर अकारण करुणा करने वाले करुणा-वरुणालय गुरु की वंदना।
  • गुरु धाम एवं गुरु वंदना का वर्णन।
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प्रकारविक्रेतामूल्यमात्रा

विवरण

वेद से लेकर रामायण तक सभी ग्रन्थों में गुरु महिमा का विस्तृत विवेचन किया गया है। अन्यान्य धर्म ग्रन्थों में भी गुरु-सेवा, गुरु-शरणागति को ही भगवत्प्राप्ति का एक मात्र उपाय बताया गया है। भगवत्पथ पर चलने के लिए सर्वप्रथम किसी श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष का मार्गदर्शन परमावश्यक है। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा प्रकटित साहित्य नानापुराण वेद सम्मत है। भक्ति सम्बन्धी तत्त्वज्ञान देकर संसारासक्त जीवों को ब्रजरस का अधिकारी बनाकर ब्रजरस में सराबोर करना ही इनके साहित्य एवं प्रवचनों का मुख्य उद्देश्य है, जो सद्गुरु-शरणागति के बिना असम्भव ही है। यद्यपि सभी शास्त्रों वेदों में गुरु गुण गान भरा पड़ा है, किन्तु वह संस्कृत भाषा में होने के कारण जनसाधारण के लिए बोध गम्य नहीं है।

‘गुरु गोविंद’ पुस्तक में जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा विरचित राधा गोविंद गीत के गुरु तत्त्व सम्बन्धी दोहों को संकलित किया गया है।

विशेष विवरण

भाषाहिन्दी
शैली / रचना-पद्धतिसंकीर्तन, दोहे
विषयवस्तुछोटी किताब, गुरु - सच्चा आध्यात्मिक पथ प्रदर्शक, भक्ति गीत और भजन, तत्वज्ञान
फॉर्मेटपेपरबैक
वर्गीकरणसंकीर्तन
लेखकजगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
प्रकाशकराधा गोविंद समिति
पृष्ठों की संख्या137
वजन (ग्राम)121
आकार12.5 सेमी X 18 सेमी X 0.8 सेमी
आई.एस.बी.एन.9789380661384

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