फादर्स-डे 2021 - एक सनातन पिता को समर्पित जिसका साथ सदा से, सदा के लिये प्राप्त है / Father's Day 2021 - Dedicated to an eternal father

 

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फादर्स -डे की हार्दिक शुभकामनायें !!

सन् उन्नीस सौ आठ में प्रथम बार मनाए गए फादर्स डे की प्रथा लगभग एक शतक ही पुरानी है जिस दिन सम्पूर्ण विश्व में लोग अपने पिता के पितृत्व, उनके योगदान एवं समर्पण के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। पर एक विचारणीय बात यह है कि अपना सर्वस्व देकर भी वह सांसारिक पिता अपनी मानवीय क्षमता और गुणों तक ही सीमित है। अब यदि किसी संतान को कोई सर्व‐समर्थ, सर्व‐अन्तर्यामी, सर्व‐साक्षी, सर्वगुण संपन्न पिता का सतत सान्निध्य प्राप्त हो जाय, तो निश्चित ही उसका जीवन निराला एवं आनंदमय ही हो। वास्तविकता यह है कि हर जीव को यह वरदान प्राप्त है, पर अज्ञानता और मोह वश वह इस रहस्य से या तो अनभिज्ञ है या उसे स्वीकार नहीं करता। 

श्री कृपालु जी महाराज ने अत्यंत ही सरल भाषा में, वैदिक प्रमाणों के साथ, हम मोह-निशा में सोये जीवों को इस दोहे और उसकी मोहक व्याख्या के माध्यम से उस परम कृपालु पिता की सतत उपस्थिति एवं अनवरत कृपाओं का ज्ञान करवाया है,

उर में सदा से रह गोविंद राधे।
जीव ब्रह्म सुत पितु संग बता दे॥ 

आइए इस विशेष व्याख्या शृंखला को पढ़ें और अपने वास्तविक पिता के स्वरूप का आत्मसात कर उनका फादर्स डे पर आभार व्यक्त करें। तभी इस त्योहार का यथार्थ साफल्य माना जाएगा। और एक दिन हम उनके दिव्यानंद को सदा-सदा के लिए प्राप्त कर धनी हो जायेंगे।

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०५ अक्टूबर २००६, भक्ति मन्दिर, मनगढ़

सदा से, सदा से माने कभी प्रारम्भ नहीं हुआ। हमारा उर भी सदा से है और हम भी सदा से हैं और भगवान् भी सदा से हैं। ये तीनों सदा से हैं। आप कहेंगे शरीर तो समाप्त हो जायगा कुछ दिन में, तो उर कहाँ रहेगा? नहीं, शरीर समाप्त होने के पहले ही सूक्ष्म शरीर मिल जाता है, उसमें भी उर रहता है। फिर आप देव योनि में जायें, नरक में जायें, कुत्ते, बिल्ली, गधे की योनि में जायें, सबके उर होता है, हृदय होता है और हृदय में ही ये दोनों रहते हैं, ये बालक जीव और पालक भगवान्। जीव पुत्र भगवान् पिता।

अमृतस्य वै पुत्राः।

(वेद)

वेद कहता है कि ये संग-संग रहते हैं दोनों। संसार का कोई बाप चौबीस घण्टे भी संग नहीं रह सकता, चौबीस घण्टे भी। क्यों? चौबीस घण्टे क्यों नहीं रह सकता। देखो, जब तक आप जाग रहे हैं, तो बाप से आप चिपटे रहें, मान लीजिये और जब आप सो गये तो आप कहाँ-कहाँ घूमते रहते हैं, बाप कहाँ-कहाँ घूमता रहता है, सपने में, संग छूट गया न। एक ही दिन में संग छूटता है। फिर सदा संग रहे, किसी का बाप किसी बेटे का ये तो असम्भव है तीन काल में और अगर रह भी लें, ये भी मान लें तो कब तक। बाप-बेटे एक साथ मरेंगे, ठीक है पॉयजन खा लो दोनों एक साथ लेकिन उसके अपने-अपने कर्म के अनुसार बाप गया, बेटा गया। फिर अलग हो गये दोनों। अनन्त बाप बना चुके आप लोग, अनन्त और हर योनि वाले को बाप बना चुके, कुत्ते, बिल्ली, गधे, सब आपके बाप हो चुके हैं।

लेकिन भगवान् ने आपका साथ नहीं छोड़ा। आप जिस भी योनि में गये उसके हृदय में, गर्भ में ही भगवान् आपके साथ हो लेते हैं। ये जीव माँ के पेट में ही प्रवेश करता है जब शरीर बनता है। उस शरीर में प्रवेश करता है तो भगवान् साथ-साथ प्रवेश करते हैं । ये जीव में जो चेतना है, ये आपकी बॉडी में कहीं भी सुई चुभोओ दर्द होता है। क्यों? बॉडी चेतन है, शरीर चेतन है। न न, शरीर तो जड़ है ये जो आत्मा इसके अन्दर आ गया, ये जीव इसलिये ये चेतन हो गया। ये निकल गया, आप कहते हैं न, मर गया। अब । अब सुई चुभोओ, चाहे भाला चुभोओ, चाहे आग में रख के जला दो। कुछ नहीं है जीरो बटे सौ।

तो आत्मा में जो चेतना है उस चेतना में शक्ति देने के लिये भगवान् को सदा साथ रहना पड़ता है। जैसे जो आपका ये शरीर बना है माँ के पेट में, तो क्या प्रबन्ध किया है भगवान् ने। माँ जो खाना खाये वो खाने का रस माँ को भी मिले, आपकी बॉडी को भी मिले। क्या बढ़िया प्रबन्ध हैं ? अन्दर ही अन्दर सब हिसाब-किताब है। कोई प्रबन्धक, कोई कर्त्ता दिखाई नहीं पड़ता और आप समझते हैं सब होता रहता है। अरे! होता कैसे रहता है ? जड़ शरीर है इसमें ये इतना वैज्ञानिक कर्म कैसे होता है कि एक बूंद रज-वीर्य से इतना विलक्षण शरीर बन गया, करोड़ों नसें? वो जीवात्मा के आने से और उस शरीर को बढ़ाने के लिये माँ का जो खाना-पीना है उससे उसको मिला बल, शक्ति, ऊर्जा और बच्चा बड़ा हो गया ये चार पौण्ड का, दो पौण्ड का, छः पौण्ड का। तो भगवान् साथ नहीं छोड़ते कभी, मरने के बाद भी। गर्भ से लेकर सर्वत्र जहाँ-जहाँ आप जायेंगे वो साथ रहेंगे।

(... to be continued)

Father's Day 2021 - Dedicated to the eternal father whose companionship lasts forever

Celebrated for the first time in the year 1908, the tradition of Father's Day is almost a century old. On this day, people all over the world express their gratitude towards their father for his contribution and dedication.

One important thing to reflect upon is that even by offering everything to his family, a worldly father is constrained by his human capacity, qualities, and circumstances. On the other hand, if a child gets the constant companionship of an omnipotent and omniscient father, then surely his life will be ever protected and blissful. The reality is that every living being is graced with this blessing, but either due to ignorance is unaware of this knowledge or due to delusion does not accept it.

Through this couplet and its enchanting explanation, substantiated with Vedic evidence, Shri Kripalu Ji Maharaj awakens all living beings who are drowned in this delusion, unaware of the constant presence and unceasing grace of our Supreme Merciful Father, in simple lucid language.

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ur mein sada se rah govind radhe, jiva brahm sut pitu sang bata de

The soul and God forever reside together in the heart, just like a son who is always under the care and protection of his father.

5 October 2006

Bhakti Mandir, Mangarh

Forever. Forever means eternal, that which is without a beginning. As individual souls, we have always existed, and our hearts have also existed ever since. And God, of course, always exists. Thus, all three are eternal. You may question how the heart can be eternal when the body itself will cease to exist after a few days? No. You get a subtle body before this material body ends, and there is a heart in that subtle body too. Wherever you go thereafter,  be it celestial region or a hellish one, whichever life form you take, each body has a heart. And in that heart both the soul and God reside together, as a child and his guardian. God as the father and the soul as his son.

अमृतस्य वै पुत्राः।

(Vedas)

The Vedas state that they both reside together. No father in the material world can stay with you forever, not even for twenty-four hours. Why? Why can't he stay for twenty-four hours? Suppose you stay awake and cling to your father all day long. But what happens in the dream state when you are asleep? Where do you go and where does your father go? You have left his company now, have you not? And this happens every single day. Thus, for him to remain with you each day, and that too, forever, is utterly impossible. Even if you still claim to be together, then for how long can this continue? Either of you will die someday. If you contend that both of you will die together by consuming poison, you will still have to go your separate ways according to your respective deeds. You all have had countless such fathers and countless sons in different life forms.

But God never left your side. Whichever form you took He accompanied you, right from the womb itself. Even the soul enters the mother's womb while the body is being formed. And simultaneously God accompanies the soul. This is the consciousness that permeates the entire body, and the reason why it hurts wherever you are pricked by a needle. Why? Is the body conscious? No, the body is inert, but the soul that has entered it has made it conscious. The moment that soul departs, you say the body is dead. Now, whether you prick it with a needle, stab it with a spear or burn it in a fire, it experiences no pain.

Therefore, to provide consciousness to the soul, God must be with us always. He makes all the arrangements in the mother's womb to form a body for you. What arrangements? The food that the mother eats nourishes both the mother and her child. What an excellent arrangement this is! Everything is so well-arranged inside. There is no apparent manager, no doer to be seen and you assume everything happens on its own. You may wonder how it happens when the body itself is inert? How does something so scientific happen from a single drop of a cell that transforms into such a wonderful body with millions of veins? All this happens due to the presence of that consciousness (God) and the mother’s intake of food that gives strength, power, and energy to her child to grow into four pounds, two pounds or six pounds.

In this way, God never leaves you, even after death. From the womb to everywhere you go, He will accompany you always.

(... to be continued)

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Comments
6/20/2021 11:49 AM
अति सुंदर
हमारे परम पूज्य प्यारे महाराज जी की जय।
💖HAPPY FATHER'S DAY💖
मैंने तुझको माना है मात पिता संसार।
यहां से जो हारा फिर तो कहां जाऊंगा सरकार।।🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
6/20/2021 11:54 AM
Hamare pran natha guru rupi pita ke sri charno me anant koi pranam
6/20/2021 12:41 PM
राधे राधे
6/20/2021 2:06 PM
जय जय श्री राधे गोविन्द, श्रीमत सदगुरुदेव श्री कृपालु महाप्रभु की जय हो
6/20/2021 3:57 PM
जय हो सद गुरु महाराज की जय हो जय जय श्री राधे कृष्णा
6/20/2021 5:05 PM
Happy Father's Day!
6/20/2021 6:02 PM
Happy Father's Day Radhey Radhey
6/20/2021 7:03 PM
Albeli sarkar ki jai !!!!!!!!!!!!
Pyare Pyare Papa ki Jai !!!!!!!!!!
6/21/2021 9:19 PM
महाराजी
प्रमाण । क्या अपने राय दूं। जीन कि बाणी हम जैसी माया वध जीव को आत्मा भीतिक राह देखते वह ही हमारा सर भूत है।
नमामि गुरुवर नमामि।
जय श्री महाराज
6/22/2021 2:45 PM
Sadguru Maharaj ki Jay. Maharaj ji you have given us spiritual knowledge. It is priceless. In return it is not possible to give you anything even my life.