Guru Tattva

Who is a genuine Guru?
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Pages: 232
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हमारे देश में बाबाओं की बाढ़ सी आयी हुई है, जो शास्‍​त्र वेद का नाम तक हीं जानते, वे लोगों के कान फूंक फूंक कर लोगों को गुमराह कर रहें हैं और धर्म के नाम पर व्यापार चला रहे हैं।जगद्​गुरु कृपालु जी महाराज ने इन सबके विरुद्ध आवाज उठाई एवं निर्भीकता पूर्वक शास्‍​त्रों के अनुसार वास्तविक गुरु कैसा होना चाहिये यह समझाकर सही मार्ग दर्शन किया। जीवनपर्यन्त उन्होंने किसी का भी कान नहीं फूंका, तब ही उनके बारे में सब बाबा यही कहते थे, न चेला बनाता है न बनाने देता है। वे स्वयं भी कहते थे ‘न गुरु न कोई चेला, कृपालु फिरे अकेला।’ वेद से लेकर रामायण तक सभी ग्रन्थों में गुरु तत्त्व का निरूपण किया गया है। आचार्य श्री ने शास्‍​त्रानुसार वास्तविक गुरु कौन और उसको कैसे पहचाना जाय? इत्यादि विषयों पर अपने अनेक प्रवचनों में प्रकाश डाला है। प्रस्तुत पुस्तक में उनके वि​भिन्‍न प्रवचनों के अंशों को संकलित किया गया है। इस विषय को समझना परमावश्यक है जिससे कोई भी साधक सही गुरु के मार्गदर्शन में साधना करके अपने चरम लक्ष्य को प्राप्त कर सके।

प्रस्तुत पुस्तक में उनके कुछ प्रवचनों के अंश संकलित किये गये हैं। पूर्णतया प्रयास किया गया है कि आचार्य श्री की दिव्य वाणी को यथार्थ रूप में ही प्रस्तुत किया जाय। अंग्रेजी भाषा के शब्द भी वैसे ही लिखे गये हैं जैसे उन्होंने बोले हैं। किन्तु फिर भी प्रस्तुति में त्रुटि के लिये पाठक क्षमा करेंगे।

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