Guru Purnima 2010

The teachings and works inspired by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
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Pages: 60
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गुरु पूर्णिमा के पावन-पर्व पर सभी साधकों को हार्दिक बधाई।
अज्ञान तिमिरान्धस्य ज्ञानांजन शलाकया।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नम:॥
करुणा वरुणालय अकारण करुण श्री कृष्ण जीवों पर कृपा करके स्वयं ही उन्हें अपनाते हैं। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य इत्यादि विकारों से अन्धे बने मायाधीन जीवों की दयनीय दशा देखकर उन्हें सन्मार्ग पर लाने के लिये कृपासिन्धु अनेक दिव्य मङ्गलमय रूप धारण करके अपने चिन्मय आनन्द रूपों से अनेक प्रकार की लीलायें करते हैं। जिनका श्रवण, कीर्तन, स्मरण संसार सागर मेें डूबते जीवों को असीम शाश्वत आनन्द प्रदान करता है। सबके परमाराध्य समय-समय पर गुरु रूप में अवतार लेकर अपने द्वारा अपनी ही आराधना करते हैं और देश काल परिस्थिति के अनुरूप जीवों को भगवत्प्राप्ति की ओर अग्रसर कर के स्वयं ही उन्हें अपनाते हैं। स्वयं ही भक्त बनकर अपनी ही भक्ति करते हैं। अपने आपको गुरु रूप में प्रतिष्ठित करके अज्ञानान्धकार को दूर करके दिव्यज्ञान प्रदान करते हैं । गुरु वर के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम।

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