Guru Dham Bhakti Mandir Combo Hindi

Get answers to your questions related to Guru Bhakti, Guru Seva and Guru Sharanagati.
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जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज को समर्पित गौरवशाली और ऐतिहासिक दिव्य मंदिर 'गुरु धाम - भक्ति मंदिर' के शुभ उद्घाटन पर, एक विशेष ऑफर प्राप्त करें और जानें क्या है -

गुरु भक्ति - वेद शास्‍​त्र सभी एक स्वर से उद्घोषित करते हैं कि भक्ति करने से ही भगवान् मिलेगा। भगवत्प्राप्ति कहो, भगवद् ज्ञान कहो, भगवत्सेवा कहो भक्ति से ही मिलेगी। अब प्रश्‍न हुआ भगवान् की भक्ति की जाय या गुरु की। भगवान् से तो डायरैक्ट कान्टैक्ट नहीं हो सकता। इसी का समाधान एवं भक्ति संबंधित सिद्धान्तों का प्रतिपादन श्री आचार्य श्री ने अनेक जगह किया है। साथ ही दम्भी गुरु से भी सावधान किया है। गुरु भक्ति में उनके कुछ प्रवचनों के अंश संकलित किये गये हैं।

गुरु सेवा - गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया भगवत्तत्त्व को जानने के लिये किसी श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्‍ठ महापुरुष के शरणागत होकर उससे जिज्ञासु भाव से प्रश्‍न करो और उसकी सेवा करो।

किन्तु यह गुरु सेवा क्या है और किस प्रकार की जाय जिससे हम अपना परम चरम लक्ष्य ‘स्वसुखवासना गंध लेश शून्य श्रीकृष्ण सुखैकतात्पर्यमयी सेवा’ प्राप्त कर सकें। सेवा सम्बन्धी तत्त्वज्ञान जो आचार्य श्री ने विभिन्‍न प्रकार से समझाया, आंशिक रूप में प्रस्तुत पुस्तक में संकलित किया गया है

गुरु शरणागति  - विश्‍व का प्रत्येक जीव एकमात्र नित्यानन्द की ही खोज में है किन्तु अनन्तानन्त जन्मों के अनवरत प्रयास के पश्‍चात् भी उस आनन्द का लवलेश भी प्राप्त न हो सका। क्याेंकि यह आनन्द केवल भगवान् को जानकर ही प्राप्त होगा। भगवान् को जानने के लिये किसी श्राेत्रिय ब्रह्मनिष्‍ठ महापुरुष की शरणागति परमावश्यक है। अहंकार के कारण हम आज तक किसी महापुरुष के शरणागत नहीं हुए।

यह शरणागति क्या है और किस प्रकार श्राेत्रिय ब्रह्मनिष्‍ठ गुरु के शरणागत होकर जीव आगे बढ़ सकता है, इत्यादि विषय अत्यध​कि महत्वपूर्ण हैं। आचार्य श्री ने इस विषय पर सैकड़ों प्रवचन दिये हैं जो हमारी एक अमूल्य निधि है किन्तु दैनिक जीव न की भाग दौड़ करते हुए सम्भव नहीं है कि हम उनके सभी प्रवचन सुन सकें। अतः उनके गुरु शरणागति सम्बन्धी प्रवचनों के प्रमुख प्रमुख अंशों को पुस्तक रूप में संकलित किया गया है। जो हर साधक के लिये परमोपयोगी है और परमावश्यक भी है। जिससे वह दम्भी गुरुओं के चंगुल से बचकर सही गुरु के शरणागत हो सके।

पूर्णतया प्रयास किया गया है कि आचार्य श्री की दिव्य वाणी को यथार्थ रूप में ही प्रस्तुत किया जाय। अंग्रेजी भाषा के शब्द भी वैसे ही लिखे गये हैं जैसे उन्होंने बोले हैं। किन्तु फिर भी प्रस्तुति में त्रुटि के लिये पाठक क्षमा करेंगे।