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6505a0ae92c860402f057220 महासखी माधुरी: 13वाँ अध्याय-प्रेम रस मदिरा - ईबुक हिन्दी https://www.jkpliterature.org.in/s/61949a48ba23e5af80a5cfdd/6505a0b092c860402f05722d/13.jpg जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज आध्यात्मिक साधक को श्री राधा कृष्ण के निष्काम प्रेम की सर्वश्रेष्ठ महापुरुष, महासखियों, से परिचित कराते हैं। प्रत्येक सखी के रूप, आभूषण और वस्त्रों की अलौकिक सुंदरता, एवं प्रत्येक की युगल सरकार के प्रति निर्धारित सेवाएं, जो युगल सरकार की प्रेम लीलाओं में सहायक बनती हैं। महसाखियों का स्थान इतना ऊँचा है कि श्री कृपालु जी ने इन सखियों के स्वरुप भारत में अपने तीनों मंदिरों में स्थापित की: भक्ति मंदिर, कृपालु धाम मनगढ़, प्रेम मंदिर, जगदगुरु कृपालु धाम, वृंदावन, और कीर्ति मंदिर, रंगीली महल, बरसाना धाम। भक्ति के इस महान संग्रह / महान निधि, 'प्रेम रस मदिरा' का यह तेरहवाँ अध्याय है। 'प्रेम रस मदिरा' के दिव्य अद्वितीय 1008 भक्ति से परिपूर्ण पद वेदों, पुराणों, उपनिषदों आदि के सिद्धांतों पर आधारित हैं। PRM Hindi ebook Ch 13
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महासखी माधुरी: 13वाँ अध्याय-प्रेम रस मदिरा - ईबुक हिन्दी

महासखी माधुरी: 13वाँ अध्याय-प्रेम रस मदिरा - ईबुक हिन्दी

भाषा - हिन्दी



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प्रकारविक्रेतामूल्यमात्रा

विवरण

जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज आध्यात्मिक साधक को श्री राधा कृष्ण के निष्काम प्रेम की सर्वश्रेष्ठ महापुरुष, महासखियों, से परिचित कराते हैं। प्रत्येक सखी के रूप, आभूषण और वस्त्रों की अलौकिक सुंदरता, एवं प्रत्येक की युगल सरकार के प्रति निर्धारित सेवाएं, जो युगल सरकार की प्रेम लीलाओं में सहायक बनती हैं। महसाखियों का स्थान इतना ऊँचा है कि श्री कृपालु जी ने इन सखियों के स्वरुप भारत में अपने तीनों मंदिरों में स्थापित की: भक्ति मंदिर, कृपालु धाम मनगढ़, प्रेम मंदिर, जगदगुरु कृपालु धाम, वृंदावन, और कीर्ति मंदिर, रंगीली महल, बरसाना धाम। भक्ति के इस महान संग्रह / महान निधि, 'प्रेम रस मदिरा' का यह तेरहवाँ अध्याय है। 'प्रेम रस मदिरा' के दिव्य अद्वितीय 1008 भक्ति से परिपूर्ण पद वेदों, पुराणों, उपनिषदों आदि के सिद्धांतों पर आधारित हैं।

विशेष विवरण

भाषाहिन्दी
शैली / रचना-पद्धतिसंकीर्तन
फॉर्मेटईबुक
वर्गीकरणप्रमुख रचना
लेखकजगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
प्रकाशकराधा गोविंद समिति

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