Daughters of India - Hindi

Presidents of JKP

 

भारत की बेटियाँ

जगद्गुरु कृपालु परिषत् की डोर थामे हैं,
...जगद्गुरु की बेटियाँ।
नये इतिहास का सृजन कर रही हैं,
...जगद्गुरु की बेटियाँ।
गुरु भक्ति, गुरु सेवा का पाठ पढ़ा रही हैं,
...जगद्गुरु की बेटियाँ।
सबकी सम्माननीय बड़ी, छोटी, मझली दीदियाँ,
...जगद्गुरु की बेटियाँ।

भारतीय सभ्यता और संस्कृति अत्यन्त प्राचीन है। यहाँ आरम्भ से ही नर-नारी को ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में बढ़ने का समान अवसर मिलता रहा है।

जब हम भारत की बेटियों की बात करते हैं तो सबसे पहले हमारा ध्यान वैदिक काल की वेदज्ञ ऋषि गार्गी और मैत्रेयी की ओर जाता है। वेदों की अनेक रचनाओं के निर्माण में गार्गी और मैत्रेयी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। गार्गी वेदज्ञ और ब्रह्मनिष्ठ थीं। गार्गी ने महर्षि याग्यवल्क्य से जो प्रश्न किया था और याग्यवल्क्य ने जाे उसका उत्तर दिया था उसके कारण ‘बृहदारण्यक उपनिषद्’ की ऋचाओं का निर्माण हुआ।
मैत्रेयी महर्षि याज्ञवल्क्य की पत्नी थीं। उन्होंने अपने पति से ब्रह्मविद्या को प्राप्त किया और ब्रह्मनिष्ठ हो गयीं। इसी प्रकार पुराणों में सावित्री, अनसूया, अरुन्धती आदि नारियों के गौरवमय चरित्र के उदाहरण मिलते हैं।

आधुनिक भारत में रानी लक्ष्मी बाई, सुचेता कृपलानी, सावित्री बाई फुले जैसी स्वतंत्रता सेनानी महिलाओं को कौन नहीं जानता? आज स्व तंत्र भारत में राजनीति, धर्म, दर्शन, साहित्य, कला, विज्ञान तकनीकि, रक्षा और खेलकूद की दुनियाँ में भारत की बेटियों ने अपना परचम लहराया है। भारत की ऐसी बेटियों पर हमें गर्व है।

पंचम मूल जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ने विश्वकल्याण हेतु जीवों के आध्यात्मिक और भौतिक उत्थान के लिए सन् 2002 में जगद्गुरु कृपालु परिषत् की स्थापना की। जगद्गुरु कृपालु परिषत् के कार्य मुख्य रूप से तीन केन्द्रों के माध्यम से संचालित किए जाते हैं - भक्ति धाम, मनगढ़, श्यामा श्याम धाम, वृन्दावन और रँगीली महल, बरसाना।

परिषत् की अध्यक्षाओं के रूप में श्री महाराज जी ने अपनी तीनों सुयोग्य बेटियों - डॉ. विशाखा त्रिपाठी, डाॅ. श्यामा त्रिपाठी और डॉ. कृष्णा त्रिपाठी को नियुक्त किया है जिन्हें सभी साधक बड़ी दीदी, मझली दीदी और छोटी दीदी के नाम से जानते हैं।

हमारी तीनों दीदियाँ निष्काम प्रेम की प्रतिमूर्ति हैं। गुरु इच्छा में इच्छा रखते हुए अहर्निश सेवा कार्यों में लगी रहती हैं। जिस प्रकार श्री महाराज जी ने अपना सम्पूर्ण  जीवन जीव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया, उसी प्रकार हमारी तीनों दीदियाँ गुरु आदेश पालन और साधकों के कल्याण के लिए अपने आप को न्योछावर कर रही हैं।

श्री महाराज जी की प्रेरणा से हमारी तीनों दीदियाँ अपने दायित्व का निर्वहन बड़ी कुशलता और तत्परता के साथ कर रही हैं। उनके कार्यों को देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि श्री महाराज जी की कृपा शक्ति ही उनके माध्यम से यह सब कार्य करा रही है।

वे गुरु भक्ति, गुरु सेवा, गुरु आज्ञा पालन का साक्षात् साकार स्वरूप हैं। निष्काम भाव से किस प्रकार सेवा कर रही हैं, यह इतिहास का एक भाग बनता जा रहा है।

हमारी तीनों दीदियों में कर्त्तापन का अभिमान लेश मात्र भी नहीं है। वे तो यही कहती हैं कि सब कुछ श्री महाराज जी ही कर रहे हैं। हम तो निमित्त मात्र हैं। इससे उनके निःस्वार्थ, निरभिमान, सरल, सहज और अलौकिक व्यक्तित्व का पता चलता है।

परम पूजनीया तीनों दीदियों के संरक्षण में जगद्गुरु कृपालु परिषत् की उज्ज्वल छवि एक जन कल्याणकारी संस्था के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। ऐसे पुनीत कार्य के लिए विश्व सदा आपका आभारी रहेगा।

जगद्गुरु कृपालु परिषत् द्वारा संचालित कार्य किस प्रकार से आगे बढ़ते जा रहे हैं। विश्वास नहीं किया जा सकता। 6 वर्षों में कहाँ से कहाँ पहुँच गयी यह संस्था। श्री महाराज जी की असीम अनुकम्पा और उनकी योगमाया शक्ति द्वारा ही यह सब सम्भव है। किन्तु उनकी तीनों बेटियाँ जिस कुशलता, लगन, परिश्रम, त्याग के साथ यह सब कार्यभार सँभाल रही हैं वह अवर्णनीय है।

आइये देखते हैं तीनों बेटियों के संरक्षण एवं नेतृत्व में कि ये गये जगद्गुरु कृपालु परिषत् के विकास कार्यों की एक झलक।

 

आध्यात्मिक क्षेत्र के उत्थान में योगदान . . .

श्री महाराज जी के सिद्धान्तों के प्रचार-प्रसार के लिए उनकी तीनों बेटियाँ रात-दिन भागीरथ प्रयास कर रही हैं। उनकी दिनचर्या प्रातः 1 बजे से प्रारम्भ हो जाती है। प्रातः 3 बजे से विदेशी भक्तों से Skype पर बातचीत करके उन्हें आध्यात्मिक उत्थान के लिए प्रेरित करते हुए नियमित साधना का एवं श्री महाराज जी की दिव्यवाणी सुनने का आदेश देती हैं। Skype पर ही उनसे श्री महाराज जी द्वारा विरचित रचनायें भी सुनती हैं। यह साधना कराने का आधुनिक ढंग उन्होंने  अपनाया है। अगले दिन की तैयारी करने में साधक पूरे दिन व्यस्त रहते हैं। अतः उनका स्वतः हरि गुरु स्मरण होता रहता है।

श्री महाराज जी द्वारा प्रारम्भ किये गये शरत्पूर्णिमा साधना शिविर, होली साधना शिविर के अतिरिक्त मुख्य -मुख्य त्यौहारों पर भी बरसाना, वृन्दावन इत्यादि स्थानों में साधना शिविर आयोजित करवाती हैं। साधना शिविर के मध्य अनेक कार्यक्रम होते हैं जिससे साधकों की श्रद्धा प्रगाढ़ होती है और सेवा भावना दृढ़ होती है।

श्री महाराज जी के प्रवचन, उनकी दिव्य लीलाओं की DVD बनवाकर साधना हाल में साधना के मध्य दिखाई जाती है जिससे साधकों का तत्त्वज्ञान परिपक्व हो जाता है। ये DVD बनवाने में स्वयं ही तीनों बेटियाँ निर्देश देती हैं, मार्गदर्शन करती हैं।

जगद्गुरु कृपालु परिषत् से सम्बद्ध प्रचारकों के क्षेत्र में उनके द्वारा आयोजित भक्तियोग साधना शिविरों में पहुँच कर साधकों में नया उत्साह, नयी प्रेरणा, नयी चेतना का संचार करती हैं।

वे जहाँ भी रहती हैं नियमित संकीर्तन चलता रहता है। सभी आश्रमवासियों के लिए प्रतिदिन आरती प्रार्थना में उपस्थित होना परमावश्यक है जो साधक लापरवाही करते हैं उनको प्यार से समझाती हैं। न मानने पर कठोर कदम उठाना पड़ता है।

श्री महाराज जी द्वारा दिये गये प्रवचनों, संकीर्तन एवं उनके द्वारा विरचित ग्रन्थों का प्रकाशन, तीनों दीदियों के मार्गदर्शन में किया जाता है। विदेशी सत्संगियों के लिए अंग्रेजी भाषा में अनुवाद किया जाता है। साथ ही अन्य भाषाओं में भी प्रकाशन कार्य चल रहा है।

अपनी ममता, स्नेह, प्रेम के आंचल में सभी साधकों को समेटे हुए बड़ी दीदी मातृवत् प्यार दुलार देकर सभी साधकों को गुरु सेवा, गुरु भक्ति का पाठ पढ़ाते हुए भगवत्पथ पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। आश्रमवासियों एवं आश्रम में आने वाले सभी साधकों के रहन-सहन, खान-पान की सुन्दर से सुन्दर व्यवस्था के लिए प्रयास करती हैं।

हर परिस्थिति में उन्हें सदैव साधकों के आध्यात्मिक उत्थान की चिन्ता बनी रहती है। अपने स्वास्थ्य की परवाह न करते हुए वे किसी भी प्रकार से साधकों को आध्यात्मिक लाभ देना चाहती हैं - हर रविवार को Times of India - Speaking Tree में उनके द्वारा लिखा गया एक लेख प्रकाशित होता है। उनका संग्रह Spirituality in Daily Living चार भागों में प्रकाशित किया गया है।

‘कृपालुं वन्दे जगद्गुरुम्’ श्री महाराज जी को समर्पित इस मन्दिर के निर्माण कार्य में उनका अवर्णनीय प्रयास रहा है। मन्दिर के नक्शे से लेकर हर पत्थर की नक्काशी उनके मार्गदर्शन में हुई है। साथ ही उसकी साज सजावट के लिए आजकल निर्माण कार्य में सेवारत सत्संगियों को अपना अमूल्य परामर्श देते हुए उत्साहित करती हैं।

जगद्गुरु की ये बेटियाँ भगवल्लीलाओं पर आधारित एवं श्री महाराज जी द्वारा विरचित पदों, दोहों इत्यादि का समावेश करते हुए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नृत्य नाटिकाओं, लीला मंचन द्वारा हर किसी साधक के हृदय में प्रेम का अंकुर प्रस्फुटित करती हैं।

WhatsApp Group बनाकर साधकों के पास श्री महाराज जी के दिव्य अनमोल वचनों को भेजकर साधकों को साधना में आगे बढ़ाती हैं। इस प्रकार जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज की तीनों बेटियाँ अपने जगद्गुरु पिता के पद चिह्नों पर चलते हुए उन्हीं की तरह रात-दिन जीवों के आध्यात्मिक उत्थान हेतु प्रयत्नशील हैं। श्री महाराज जी की तीनों सुपुत्रियाँ उनके द्वारा चलाये गये सभी जीवकल्याण के कार्यों को अत्यधिक कठिन परिश्रम कर सुचारु एवं व्यवस्थित रूप में आगे बढ़ा रही हैं।

आधुनिक टैक्नालॉजी का उपयोग करते हुए तीनों बेटियों का पूर्ण प्रयास रहता है कि अपने जगद्गुरु पिता के द्वारा प्रकटित शास्त्र वेद सम्मत दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाया जाय। अतः उन्होंने जगद्गुरु कृपालु परिषत् को विशेष निर्देश दिया हुआ है कि T.V. चैनल्स पर श्री महाराज जी का प्रवचन कभी भी बन्द नहीं होना चाहिए। T.V. पर जो भी प्रवचन प्रसारित किये जाते हैं, उसका चयन वे स्वयं करती हैं। यू-ट्यूब, वैब साइट, फेसबुक, ट्वीटर, इन्स्टाग्राम, मोबाईल फोन, व्हाट्सएप, ऑनलाइन रेडियो के माध्यम से भी आज श्री महाराज जी के तत्वज्ञान का विस्तृत प्रचार कर वे हजारों लाखों लोगों को इससे लाभान्वित कर रही हैं।

 

चिकित्सा , शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र के उत्थान में बहुमूल्य योगदान . . .

आध्यात्मिक उत्थान के साथ ही भौतिक क्षेत्र के उन्नयन का जो बीड़ा जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज ने उठाया था उसे उनकी तीनों बेटियों ने अपने अथक प्रयासों द्वारा आज उन्नति के शिखर पर पहुँचाया है।
जगद्गुरु कृपालु परिषत् द्वारा पिछले 6 वर्ष के अल्पकाल में ही लगभग 40 लाख लोगों को चिकित्सा सुविधा, 60000 बालिकाओं को उत्तम शिक्षा तथा 10 लाख गरीबों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

धर्मार्थ चिकित्सालय

जगद्गुरु कृपालु चिकित्सालय मनगढ, वृन्दावन एवं बरसाना

जगद्गुरु कृपालु परिषत् द्वारा अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त तीन पूर्णतया निःशुल्क चिकित्सालय संचालित किये जा रहे हैं।
जहाँ अन्न, वस्त्र, आश्रय आदि मूलभूत आवश्यकताएँ भी पूरी नहीं हो पाती ऐसे दुर्गम क्षेत्र में रहने वाली जनता इन चिकित्सालयों द्वारा प्रदान की जा रही निःशुल्क सुविधाओं से अत्यधिक लाभान्वित हो रही है।
जगद्गुरु कृपालु चिकित्सालय मनगढ़, वृन्दावन एवं बरसाना द्वारा प्रतिदिन लगभग 1500 मरीजों को निःशुल्क परामर्श, इलाज एवं औषधियाँ प्रदान की जाती हैं। सामान्य चिकित्सा , शल्य चिकित्सा , ई.एन.टी., नेत्र चिकित्सा, दंत चिकित्सा, हड्डी रोग चिकित्सा, चर्म रोग, स्त्री रोग के साथ-साथ फिज़ियोथेरेपी, एक्यूप्रेशर, आयुर्वेदिक, प्राकृतिक चिकित्सा एवं होम्योपैथी विभाग के द्वारा गरीब एवं पीड़ितों की नि:शुल्क चिकित्सा सेवा की जाती है।
इसके अतिरिक्त तीनों अस्पतालों में एक्स-रे, अल्ट्रासाउण्ड आदि से युक्त रेडियोलॉजी लैब तथा रक्त, पेशाब आदि जाँच हेतु पैथोलॉजी लैब की सुविधायें भी उपलब्ध हैं।
नेत्र रोग से पीड़ित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुये जे.के.सी. मनगढ़ में नये नेत्र विभाग ‘जगद्गुरु कृपालु नेत्र चिकित्सालय’ का निर्माण किया गया जिसका उद्घाटन 26 जुलाई, 2009 को श्री महाराज जी के करकमलों द्वारा सम्पन्न हुआ।
जे.के.सी. बरसाना में भी इसी प्रकार नया नेत्र विभाग स्थापित किया गया।
जे.के.पी. के तीनों अस्पतालों में साल में कई बार नेत्र शिविरों का आयोजन किया जाता है एवं मोतियाबिन्द के हजारों मरीजों का अत्याधुनिक पद्धतियों से ऑपरेशन किया जाता है। इसके अतिरिक्त समय-समय पर निःशुल्क हृदय जाँच शिविर, रक्तदान शिविर तथा प्राकृतिक योग चिकित्सा शिविर लगाये जाते हैं।

 

महिला शिक्षा

कृपालु बालिका प्राइमरी स्कूल, कृपालु बालिका इण्टरमीडिएट कॉलेज एवं कृपालु महिला महाविद्यालय

श्री महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन एवं सुश्री डाॅ. विशाखा त्रिपाठी जी की अध्यक्षता में ग्रामीण क्षेत्र कुण्डा, प्रतापगढ़ (यू.पी.) में तीन शिक्षण संस्थानों (कृपालु बालिका प्राइमरी स्कूल, कृपालु बालिका इण्टरमीडिएट कॉलेज एवं कृपालु महिला महाविद्यालय) की स्थापना की गई। श्री महाराजजी की असीम अनुकम्पा से सन् 2005 से यह कृपालु बालिका शिक्षण संस्थान पूर्णतया निःशुल्क कर दिया गया जो प्राइमरी से पोस्टग्रेजुएशन तक छात्राओं को न केवल निःशुल्क शिक्षा प्रदान  करता है अपितु उनके बहुआयामी व्यक्तित्त्व विकास के लिये भी सदैव प्रयत्नशील है।
छात्राओं को पाठ्य सामग्री , स्कूल यूनिफार्म , साइकिल, जैकेट, कम्बल इत्यादि आवश्यकता की वस्तुएँ भी निःशुल्क दी जाती हैं।
उच्च शिक्षा हेतु स्नातक स्तर पर कला व विज्ञान संकाय, स्नातकोत्तर स्तर पर कला संकाय, शिक्षा संकाय (बी.एड.) एवं बी.एड. की छात्राओं के लिये छात्रावास सुविधा भी उपलब्ध हैं।
दुर्भाग्यवश हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी के कारण माता-पिता अपनी बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दे पाते। अल्प आयु में ही उन्हें घर गृहस्थी के काम करने पड़ते हैं अथवा उनका विवाह कर दिया जाता है जिससे परिवार के निर्वाह में सदस्यों की संख्या कम हो जाय। ऐसी कठिन सामाजिक परिस्थितियों में बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिये श्री महाराजजी द्वारा स्थापित निःशुल्क कृपालु बालिका शिक्षण संस्थान के माध्यम से हजारों छात्राएँ उत्तम शिक्षा प्राप्त कर अपने सपने साकार कर रही हैं।

 

सामाजिक सेवा

निर्धन सहायता कोष

निर्धन सहायता कोष द्वारा जगद्गुरु कृपालु परिषत् समाज के लाखों अभावग्रस्त लोगों की सहायता के लिये प्रतिवर्ष विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करती है। खाद्य सामग्री , गरम जैकेट, कम्बल, बर्तन, साइकिल आदि दैनिक उपयोग की विविध वस्तुयें तथा स्वच्छ भारत अभियान के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामवासियों की सुविधा हेतु शौचालय निर्माण जैसे अनेक परोपकारी कार्य भी संस्था द्वारा किये जाते हैं। इन सभी सामाजिक कार्यों का विस्तृत विवरण  jkp.org.in/philanthrophy वेबसाइट पर देखें।


प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में सहयोग

जगद्गुरु कृपालु परिषत् ने राष्ट्रीय आपदाओं में सदैव बहुमूल्य आर्थिक सहायता की है, चाहे वो गुजरात भूकम्प, सुनामी, बिहार या जम्मू -कश्मीर बाढ़ हो, चाहे उत्तराखण्ड जलप्रलय या COVID-19 महामारी। किसी भी नैसर्गिक आपदा या राष्ट्रीय संकट के समय इस संस्था ने सदा अपना सक्रीय सहयोग दिया है।


भारतीय धर्म संस्कृति को उजागर करके जीवों के आध्यात्मिक एवं भौतिक उत्थान हेतु अपने पिता जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज की कल्याणकारी योजनाओं द्वारा भारत को प्रगतिशील पथ पर ले जाने में अग्रगण्य उनकी तीनों बेटियों पर हमें गर्व है।

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Comments
4/17/2020 11:27 AM
Shri Maharaj Ji Ki Jai!!

Pranaam to all didis for their restless efforts in the elevation of mankind! A grand Salute!!
Jai JAi Shree Radhey!!
4/17/2020 12:02 PM
राधारानी की विशेष कृपा इन तिनो सहचरियोने पायी है, इसलिये इतनी अद्भुत तथा दिव्य कर्म करनेकी प्रवृत्ती और हमारे प्रिय अध्यात्मिक पिता श्री कृपालु महाराज की हित लीला का पुरे विश्व भर प्रसार करनेका कार्य, दोनो प्रशंसनीय है।
4/17/2020 12:24 PM
जय जय श्री राधे
May God bless me to realize all these graces
4/17/2020 12:31 PM
I love maharaj ji & didis
4/17/2020 1:33 PM
Radhe Radhe,                                        Uncountable Grace have no words.                                                        Jai Jai Shree Kripalu Bhagwan ki Jai
4/17/2020 1:40 PM
Radhey Radhey Badi Jiji Majhali  Jiji Chooti Ji...
Aapke Charano me koti koti naman or Pranam.
4/17/2020 2:15 PM
I love didi
4/17/2020 3:23 PM
जय हो
4/17/2020 3:55 PM
VSK Sarkar ki Sada Jay ho. !!!!
4/18/2020 11:13 AM
We are proud to be associated with the JKP .
Kewal bhagwaan hee jaante hai ki mujh jaise patit , adham ko shri maharaj ji kaise mil gaye .....
Balihaar hai unki dayaluta ......
Albeli sarkar ki jai !!!!!!!
4/18/2020 12:06 PM
महाराज जी द्वारा किये जा रहे इन कृपाओ  की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी ही कम है । राधे राधे ।
4/21/2020 10:26 AM
Jai Jai  Shri Radhe
5/7/2020 1:38 AM
RadheRadhe