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'श्रीराम-नवमी' : भगवान् श्री रामचन्द्र जी का प्राकट्योत्सव

भगवान् श्री रामचन्द्र जी के प्राकट्योत्सव 'श्रीराम-नवमी' की अनंत-अनंत शुभकामनायें!!

आजु अवध महँ प्रकटे राम,

बोलो जय राम, जय राम जय जय राम।

(जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - ब्रज रस माधुरी भाग - 1)

अनंतकोटि ब्रम्हाण्डनायक दशरथ-कौशल्यानंदन सियावर प्रभु श्रीरामचन्द्र जी का आज प्राकट्योत्सव है। भगवान् श्रीराम अनंत गुणों के समुद्र हैं, जिनकी महिमा अनंत संतों ने गाई है। पंचम मूल जगदगुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज ने अपने रस-साहित्यों तथा प्रवचनों में जहाँ श्रीराधाकृष्ण तथा ब्रजरसपरक पद-कीर्तन तथा दर्शन का विशद वर्णन किया है वहीं अनगिनत स्थानों पर रघुकुलशिरोमणि दीनबन्धु भगवान् श्रीराम के गुणों का भी वर्णन करते हुये उनकी स्तुति की है तथा वेदादिक शास्त्रों में निरूपित श्रीराम-तत्त्व का भी विशद वर्णन किया है, जिसमें उन्होंने राम तथा कृष्ण - दोनों की एकता अथवा अभेदता का स्पष्ट प्रतिपादन किया है।

सनातन वैदिक धर्म के संवाहक, वेदमार्गप्रतिष्ठापनाचार्य श्री गुरुवर ने श्रृंगवेरपुर, चित्रकूट, अयोध्या, नासिक, रामेश्वरम सभी स्थानों पर भक्त मंडली के साथ जाकर श्रीराम-नाम, गुणादि का संकीर्तन कराया है। 'हरे राम' महामंत्र का तो उन्होंने नित्य प्रति ही संकीर्तन किया है। कई बार अखंड संकीर्तन भी हुआ इसी महामंत्र का। छः महीने की लंबी अवधि तक भी 'हरे राम' संकीर्तन हुआ है। अतः श्री कृपालु महाप्रभु जी ने राम-कृष्ण में अभेद माना है। श्रीवृन्दावन स्थित प्रेम-मन्दिर, बरसाना धाम स्थित कीर्ति-मन्दिर तथा भक्तिधाम मनगढ़ स्थित भक्ति-मन्दिर तीनों ही स्थानों पर उन्होंने श्रीसीताराम एवं श्रीराधाकृष्ण दोनों के ही दिव्य विग्रह स्थापित किये हैं। रामनवमी का पर्व भी उसी हर्षोल्लास के साथ मनाया जैसे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और श्रीराधाष्टमी।

आइये उन्हीं के द्वारा प्रगटित साहित्यों में से कुछ आधार लेकर हम भी अपने परमाराध्य श्रीराम जी की स्तुति करें तथा उनके वास्तविक तत्त्व का परिचय प्राप्त करें,

भगवान् श्री रामचन्द्र की स्तुति

श्री राम पूर्णब्रह्म सुखधाम, श्री राम कोटि काम अभिराम।

दशरथ अजिर बिहारी राम, कोटि मदन मनहारी राम।

राम नाम गुन लीला धाम, सुमिरिय छिन छिन आठों याम।

रामहिं गाइय सुमिरिय राम, भाव रहे उर महँ निष्काम।

मेरे ठाकुर सीताराम, मोहिं नहिं चह बैकुण्ठ ललाम।

(जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - ब्रज रस माधुरी भाग – 1, पद संख्या 15, पृष्ठ 270)

 

'प्रेम-रस-मदिरा' ग्रंथ, सिद्धान्त-माधुरी के 27वें पद में श्रीराम-कृष्ण तत्त्व की समानता पर प्रकाश

अवध के राम बने ब्रज श्याम।

लखन बने बलराम जानकी, राधारानी नाम।

संपूर्ण पद एवं भावार्थ के लिए पढ़ें श्रीराम-कृष्ण तत्त्व की समानता

 

पुनः आप सभी सुधि तथा भगवत्प्रेमी पाठक जनों को 'श्रीराम नवमी' की अनन्तानन्त शुभकामनायें!!

 

संदर्भित पुस्तकें

ब्रज रस माधुरी भाग 1

प्रेम रस मदिरा

 

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