Your browser does not support JavaScript!

G-12, G-14, Plot No-4 CSC, HAF Sector-10, Dwarka 110075 New Delhi IN
JKP Literature
G-12, G-14, Plot No-4 CSC, HAF Sector-10, Dwarka New Delhi, IN
+918588825815 //cdn1.storehippo.com/s/61949a48ba23e5af80a5cfdd/621dbb04d3485f1d5934ef35/webp/logo-18-480x480.png" rgs@jkpliterature.org.in

श्रीराम-कृष्ण तत्त्व की समानता

पंचम मूल जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज ने अपने रस-साहित्यों तथा प्रवचनों में जहाँ श्रीराधाकृष्ण तथा ब्रजरसपरक पद-कीर्तन तथा दर्शन का विशद वर्णन किया है वहीं अनगिनत स्थानों पर रघुकुलशिरोमणि दीनबन्धु भगवान् श्रीराम के गुणों का भी वर्णन करते हुये उनकी स्तुति की है तथा वेदादिक शास्त्रों में निरूपित श्रीराम-तत्त्व का भी विशद वर्णन किया है, जिसमें उन्होंने राम तथा कृष्ण - दोनों की एकता अथवा अभेदता का स्पष्ट प्रतिपादन किया है। ऐसी ही एक रचना की झलक उनके द्वारा रचित ग्रंथ ‘प्रेम रस मदिरा’ से,

 

श्रीराम-कृष्ण तत्त्व की समानता पर प्रकाश

अवध के राम बने ब्रज श्याम।

लखन बने बलराम जानकी, राधारानी नाम।

त्रेता में बड़भ्रात राम भये, द्वापर में बलराम।

मुकुट, ग्रीव, कटि, पद टेढ़ो करि, प्रकटे चंचल राम।

योगारूढ़ जीव हित कीन्ही, लीला रास ललाम।

पग पलुटावति सदा जानकी, रामहिं येहि ब्रजधाम।

इनमें भेद 'कृपालु' मान जो, नरकहुँ नाहीं ठाम।।

(जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - प्रेम रस मदिरा-3.27)

 

भावार्थ - अयोध्या के भगवान् राम ही ब्रज में श्याम (कृष्ण) बनकर प्रकट हुये। लक्ष्मण जी बलराम बन गये एवं श्री जानकी (सीता) जी राधारानी के नाम से प्रख्यात हुईं। त्रेता में बड़े भाई राम हुये एवं द्वापर में बड़े भाई बलराम हुये। भगवान् राम ब्रज में मुकुट, गर्दन, कमर एवं पैरों को टेढ़ा करके चंचल स्वभाव से प्रकट हुये एवं मायातीत जीवों के लिये आदर्श स्थापित करते हुये दिव्य रासलीला का अभिनय किया। ब्रज में श्री जानकी जी ने भगवान् राम से अपने चरण दबवाये। 'श्री कृपालु जी' कहते हैं कि इन दोनों (राम-कृष्ण) में जो भेदभाव रखता है वह नामापराधी है, उसको नरक में भी स्थान नहीं मिल सकता।

 

संदर्भित पुस्तकें

प्रेम रस मदिरा

 

संबंधित आलेख

'श्रीराम-नवमी' : भगवान् श्री रामचन्द्र जी का प्राकट्योत्सव

राम और कृष्ण में भेदभाव मानना बहुत बड़ा अपराध है

 

संबंधित पुस्तकें

हरे राम

तुलसी जयंती

भगवन्नाम महात्म्य

ब्रज रस माधुरी भाग 1


0 Comment


Leave a Comment