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होली माहात्म्य

  • By Radha Govind Samiti
  • •  Mar 18, 2022

'होली महोत्सव 2022' पर समस्त भगवत्प्रेमी जनों को हार्दिक शुभकामना!!

आज होली का महापर्व है। आइए जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा 'होली' के सम्बन्ध में रचित कुछ दोहे तथा इसके माहात्म्य पर उनके द्वारा निःसृत प्रवचन के अंश द्वारा वास्तविक होली मनाने के विषय में ज्ञान प्राप्त करें।

'..अधिकतर लोग यही समझते हैं कि रंग, गुलाल से खेलना, हुड़दंगबाजी करना, तरह तरह के स्वादिष्ट व्यंजन खाना यही होली मनाने से तात्पर्य है। वास्तव में होली का पावन पर्व श्रीकृष्ण की निष्काम अनन्य भक्ति का पर्व है। होली मनाने का अभिप्राय ही है प्रह्लाद चरित्र को समझते हुए उनके भक्ति सम्बन्धी सिद्धान्तों का अनुसरण करना। अत: होली मनाने का सर्वश्रेष्ठ ढंग यही है कि रूपध्यान युक्त श्री राधा कृष्ण नाम, रूप, लीला, गुण, धाम, जन का गुणगान करुणक्रन्दन करते हुये किया जाय। अहर्निश भगवन्नाम संकीर्तन ही होली महोत्सव है। यही कलयुग में भगवत्प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन है..'

जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज द्वारा 'होली' के संबंध में रचित दोहा तथा उसका सरलार्थ

सब पर्व लक्ष्य एक गोविंद राधे,
जग ते हटा के मन हरि में लगा दे..

-सभी पर्वों का एकमात्र लक्ष्य यही होता है कि हम अपना मन संसार से हटाकर भगवान में लगाने का अभ्यास करें

ऐसा रंग डारो श्याम गोविंद राधे।
तनु ही न मन श्याम रंग में डुबा दे॥ ९८०५॥

- राधा गोविंद गीत, लीला माधुरी

जीवात्मा भगवान श्रीकृष्ण से कहती है कि हे श्यामसुन्दर! मुझे सांसारिक रंगों की चाह नहीं, मेरी तो कामना यही है कि आप मुझ पर अपने प्रेम का ऐसा रंग डालें जिसमें मेरा तन ही नहीं, अपितु सर्वस्व ही आपके प्रेम-रंग में रँग जाय।

Suggested Books
Radha Govind Geet (Hindi)
Sadhan Sadhya Holi Editions (Hindi)


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